शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026
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सोनम वांगचुक को मेडिकल आधार पर रिहा नहीं किया जा सकता, वे फिट और स्वस्थ: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सोनम वांगचुक स्वस्थ हैं और उन्हें मेडिकल आधार पर रिहा नहीं किया जा सकता। उनकी हिरासत के कारण अब भी लागू बताए गए हैं।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को मेडिकल आधार पर रिहा नहीं किया जा सकता क्योंकि वे “फिट और स्वस्थ” हैं। वांगचुक को पिछले साल लेह में हुई हिंसक झड़पों के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था और फिलहाल वे जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ के समक्ष यह जानकारी दी। अदालत ने पहले वांगचुक की खराब स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनकी रिहाई की संभावना पर विचार करने को कहा था। इस पर केंद्र ने कहा कि जेल मैनुअल के अनुसार उनकी 24 बार मेडिकल जांच की जा चुकी है और उनकी स्थिति ठीक है।

मेहता ने अदालत को बताया कि वांगचुक को केवल पाचन संबंधी समस्या और एक संक्रमण है, जो गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि मेडिकल आधार पर रिहाई देने से “सकारात्मक परिणाम नहीं होंगे” और जिन कारणों से उन्हें हिरासत में लिया गया था, वे अभी भी लागू हैं। इसलिए स्वास्थ्य आधार पर रिहाई संभव नहीं है और न ही यह उचित होगा।

और पढ़ें: सोनम वांगचुक लद्दाख को नेपाल-बांग्लादेश जैसा बनाना चाहते थे: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का बचाव

वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। केंद्र और लद्दाख प्रशासन ने अदालत में कहा कि वांगचुक को सीमा क्षेत्र में लोगों को भड़काने के आरोप में हिरासत में लिया गया था, जहां क्षेत्रीय संवेदनशीलता जुड़ी हुई है।

सरकार ने यह भी कहा कि वांगचुक ने युवाओं को नेपाल और बांग्लादेश जैसे आंदोलनों की तर्ज पर विरोध के लिए प्रेरित करने की कोशिश की थी। हालांकि वांगचुक इन आरोपों से इनकार कर चुके हैं और उन्होंने कहा कि सरकार की आलोचना करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है। वांगचुक को 26 सितंबर को हिरासत में लिया गया था, जब लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन हुए थे।

और पढ़ें: कम RTI अपील वाले राज्यों में मानवाधिकार आयोग को अस्थायी सूचना आयोग क्यों नहीं बनाया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

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