कॉर्नेल यूनिवर्सिटी रेप मामला: पीड़िता के वकील बोले- वह लगातार डर में जी रही है
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के फ्रेटरनिटी हाउस में कथित सामूहिक दुष्कर्म की शिकार महिला के वकील थॉमस गिउफ्रा ने कहा कि धमकियों और पहचान उजागर होने के बाद उनकी मुवक्किल लगातार डर और सदमे में जी रही है।

न्यूयॉर्क की सिविल अदालत में शुक्रवार को हुई सुनवाई से पहले, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में कथित सामूहिक दुष्कर्म की शिकार महिला के वकील थॉमस गिउफ्रा ने बताया कि उनकी मुवक्किल का जीवन पूरी तरह से उलट-पुलट हो गया है। गुमनाम रूप से "जेन डो" के नाम से जानी जाने वाली इस महिला ने आरोप लगाया है कि अक्टूबर 2024 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के ची फाई फ्रेटरनिटी हाउस में उसे नशीला पदार्थ देकर कई पुरुषों ने दुष्कर्म किया था। उसने यूनिवर्सिटी और फ्रेटरनिटी के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।
गिउफ्रा ने बताया कि यह मामला जब सार्वजनिक हुआ तो "आई एम जेन डो" नाम से एकजुटता दिखाने वाली पोस्ट्स की बाढ़ आ गई, लेकिन साथ ही एक अलग अभियान भी चला जिसका मकसद महिला की पहचान उजागर करना और आरोपी पुरुषों का बचाव करना था। आरोपी पुरुषों पर अभी तक कोई आपराधिक आरोप नहीं लगाया गया है, हालांकि उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया है और महिला ने उन्हें भी मुकदमे में प्रतिवादी बनाया है।
वकील ने बताया कि पिछले कुछ हफ्ते उनकी मुवक्किल के लिए बेहद कठिन रहे हैं और वह बस "किसी तरह गुजारा" कर रही है। उन्होंने कहा कि उसने मुकदमा दायर करने का फैसला इसलिए किया ताकि उसे मानसिक शांति मिल सके और वह अपनी खोई हुई ताकत वापस पा सके। गिउफ्रा ने इस सप्ताह महिला से मुलाकात की और पाया कि वह ठीक से सो नहीं पा रही और नींद के लिए दवाओं पर निर्भर है। वह अब ट्रॉमा थेरेपी ले रही है और अपने ही घर में सुरक्षित महसूस नहीं करती, क्योंकि उसे और उसके परिवार को धमकियां मिली हैं।
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उन्होंने बताया कि महिला का पता ऑनलाइन बिना सहमति के सार्वजनिक कर दिया गया था, जिसके बाद किसी ने झूठी आपातकालीन कॉल कर दी, जिसके चलते पुलिस पूरी तैयारी के साथ हथियार लेकर उसके पिता, भाई और एक दोस्त के सामने पहुंच गई। इसके बावजूद गिउफ्रा के अनुसार महिला का हौसला कमजोर नहीं हुआ है और वह कॉर्नेल यूनिवर्सिटी ही नहीं, पूरे देश में पीड़ितों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी ने शुरुआत में अपने अनुशासनात्मक कदमों का बचाव किया, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि जेन डो के मामले को संभालने में कमी रही। दबाव बढ़ने पर यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष ने घोषणा की कि शैक्षणिक सत्र समाप्त होने तक फ्रेटरनिटी पार्टियां स्थगित रहेंगी ताकि यह समीक्षा हो सके कि इन्हें सुरक्षित रूप से कैसे जारी रखा जा सकता है। यूनिवर्सिटी ने अपने पुलिस बल में यौन उत्पीड़न जांचकर्ता भी शामिल करने की बात कही है।
गिउफ्रा ने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि कॉर्नेल यूनिवर्सिटी ने अब तक उनसे संपर्क नहीं किया और उनका मानना है कि यूनिवर्सिटी केवल "नुकसान नियंत्रण" में जुटी है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी के साथ किसी भी समझौते में ऐसे कदम शामिल होने चाहिए जिससे भविष्य में कोई और "जेन डो" न बने, और अगर बने तो उसे पूरा समर्थन मिले।
न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होकुल ने इस मामले की दोबारा जांच के लिए राज्य की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स को विशेष अभियोजक नियुक्त किया है, ताकि यह तय हो सके कि आपराधिक आरोप लगाए जाने चाहिए या नहीं। गिउफ्रा को आशंका है कि उचित जांच में लंबा समय लगेगा और तब तक स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद सबूत नष्ट हो सकते हैं। फिर भी उन्हें भरोसा है कि सिविल मामले में, जहां सबूत का मानक आपराधिक मामलों से कम होता है, वे जीत हासिल कर सकते हैं।
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