फिल्म रिव्यू: अक्यूज्ड में कोंकोना सेन शर्मा और प्रतिभा रांता का दमदार अभिनय भी कमजोर कहानी को नहीं संभाल पाया
'अक्यूज्ड' में गंभीर मुद्दे और कोंकोना सेन शर्मा की बेहतरीन अदाकारी के बावजूद कमजोर पटकथा और धीमी कहानी इसे प्रभावशाली सामाजिक ड्रामा या थ्रिलर नहीं बना पाती।
अनुभूति कश्यप द्वारा निर्देशित फिल्म 'अक्यूज्ड' एक मेडिकल ड्रामा है, जो यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर मुद्दे पर आधारित है। फिल्म में कोंकोना सेन शर्मा और प्रतिभा रांता ने शानदार अभिनय किया है, लेकिन कमजोर पटकथा के कारण कहानी पूरी तरह प्रभावशाली नहीं बन पाई।
फिल्म की कहानी डॉ. गीतिका सेन (कोंकोना सेन शर्मा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो लंदन के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में गायनेकोलॉजिस्ट हैं। उनकी पत्नी डॉ. मीरा (प्रतिभा रांता) बच्चों की डॉक्टर हैं। दोनों खुशहाल जीवन जी रहे हैं और जल्द ही एक बच्चे को गोद लेने की योजना बना रहे थे। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन एक सुबह अस्पताल के एचआर डिपार्टमेंट को अज्ञात ईमेल मिलता है, जिसमें गीतिका पर यौन शोषण का आरोप लगाया गया है।
फिल्म में भारी विषय को हल्के ढंग से पेश किया गया है। कहानी सतही रह जाती है और दर्शकों को मनोवैज्ञानिक दबाव या सामाजिक कलंक की गहराई का अनुभव नहीं होता। लंदन और उच्च प्रोफ़ाइल अस्पताल के सेटिंग के बावजूद थ्रिलर की आवश्यकता वाली उत्तेजना या तनाव नहीं बन पाता।
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किंतु फिल्म देखने लायक है क्योंकि कोंकोना सेन शर्मा और प्रतिभा रांता का अभिनय उत्कृष्ट है। कोंकोना अपनी भूमिका में भावनाओं और आंतरिक संघर्ष को बेहतरीन ढंग से दर्शाती हैं, जबकि प्रतिभा रांता पत्नी के भरोसे और संदेह के बीच की जटिलताओं को बहुत ही सूक्ष्मता से पेश करती हैं।
फिल्म का निर्देशन स्पष्ट है, लेकिन पटकथा में संगति की कमी इसे कमजोर बनाती है। क्लाइमेक्स और असली अपराधी का खुलासा भी औसत प्रतीत होता है।
निष्कर्ष
'अक्यूज्ड' में दम है, लेकिन यह अपनी पूरी क्षमता पर खरा नहीं उतरती। अगर आप मुख्य अभिनेत्रियों के अभिनय के शौकीन हैं, तो इसे देखा जा सकता है।
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