भूत बंगला रिव्यू: हंसी का तड़का ज्यादा, डर का असर कम—अक्षय कुमार की फिल्म औसत मनोरंजन
‘भूत बंगला’ में कॉमेडी मजबूत लेकिन हॉरर कमजोर है। पहला हाफ मनोरंजक है, जबकि दूसरा हिस्सा धीमा और बिखरा हुआ है, जिससे फिल्म औसत बन जाती है।
भूत बंगला में प्रियदर्शन और अक्षय कुमार की जोड़ी एक बार फिर साथ नजर आई है। ‘हेरा फेरी’ और ‘भूल भुलैया’ जैसी सुपरहिट फिल्मों के बाद इस जोड़ी से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन यह फिल्म उन उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती।
फिल्म की कहानी काल्पनिक गांव मंगलपुर में सेट है, जहां वधुसुर नामक राक्षस की कथा प्रचलित है। कहानी तब मोड़ लेती है जब अर्जुन (अक्षय कुमार), उनकी बहन मीरा (मिथिला पालकर) और पिता वासुदेव (जिशु सेनगुप्ता) को वहां एक पुश्तैनी महल मिलता है। अर्जुन अपनी बहन की शादी उसी महल में कराने पर अड़ जाता है, जबकि गांव वाले इसे अभिशप्त मानते हैं।
फिल्म का पहला भाग हल्के रहस्य और शानदार कॉमेडी से भरा है। कई दृश्य प्रियदर्शन की पुरानी फिल्मों जैसे ‘हंगामा’ और ‘भागम भाग’ की याद दिलाते हैं। लेकिन दूसरे हाफ में फिल्म की पकड़ कमजोर हो जाती है और कहानी बिखरी हुई लगती है।
अभिनय की बात करें तो अक्षय कुमार की कॉमिक टाइमिंग अच्छी है, लेकिन उनके अभिनय में नयापन कम दिखता है। सहायक कलाकारों में राजपाल यादव, परेश रावल और असरानी शानदार प्रदर्शन करते हैं और दर्शकों को खूब हंसाते हैं। वहीं तब्बू का किरदार कमजोर लिखा गया है।
तकनीकी रूप से फिल्म औसत है। बैकग्राउंड म्यूजिक और वीएफएक्स प्रभावी नहीं हैं, हालांकि सिनेमैटोग्राफी अच्छी है। फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका पहला हाफ और कॉमिक केमिस्ट्री है, जबकि सबसे बड़ी कमजोरी इसका असंतुलित टोन और कमजोर क्लाइमैक्स है।
कुल मिलाकर, ‘भूत बंगला’ एक बार देखने लायक फिल्म है, जो हंसी तो देती है, लेकिन डराने में असफल रहती है।