×
 

इंस्पेक्टर अविनाश 2 रिव्यू: रंदीप हुड्डा की दमदार अदाकारी ने जिंदा किया 90 के दशक का उत्तर प्रदेश

‘इंस्पेक्टर अविनाश 2’ में रंदीप हुड्डा की शानदार एक्टिंग और दमदार सिनेमैटोग्राफी देखने को मिलती है, हालांकि कमजोर लेखन और घिसे-पिटे संवाद इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बने।

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उत्तर प्रदेश की अपराध और पुलिस व्यवस्था पर आधारित कहानियों की कमी नहीं है। ‘मिर्जापुर’ और ‘पाताल लोक’ जैसी सीरीज के बाद अब निर्देशक नीरज पाठक की ‘इंस्पेक्टर अविनाश 2’ दर्शकों के बीच चर्चा में है। यह सीरीज 1990 के दशक के उत्तर प्रदेश की हिंसा, गैंगवार और पुलिस राजनीति को बड़े पैमाने पर पेश करती है।

सीरीज में रंदीप हुड्डा एक बार फिर एसटीएफ अधिकारी अविनाश मिश्रा के किरदार में नजर आए हैं। इस बार कहानी सिर्फ अपराधियों से मुठभेड़ तक सीमित नहीं रहती, बल्कि अविनाश की निजी जिंदगी के संघर्षों को भी दिखाती है। जब उनके बेटे वरुण पर हत्या का आरोप लगता है, तब कहानी भावनात्मक मोड़ लेती है।

सीरीज की सबसे बड़ी ताकत रंदीप हुड्डा की अभिनय क्षमता है। उन्होंने अपने किरदार को सिर्फ एक एक्शन हीरो की तरह नहीं निभाया, बल्कि उसमें मानवीय भावनाओं को भी उभारा है। वहीं अमित सियाल ने शेख के किरदार में खतरनाक मौजूदगी दर्ज कराई है। अभिमन्यु सिंह भी देविकांत त्रिवेदी के रूप में प्रभाव छोड़ते हैं।

तकनीकी पक्ष की बात करें तो सिनेमैटोग्राफर चिरंतन दास ने 90 के दशक के उत्तर प्रदेश के धूल-धक्कड़ और हिंसक माहौल को शानदार तरीके से पर्दे पर उतारा है। हालांकि सीरीज की लेखनी कई जगह कमजोर पड़ती दिखाई देती है। संवाद कई बार पुराने क्राइम ड्रामा जैसे लगते हैं और कहानी में जरूरत से ज्यादा सब-प्लॉट होने से मुख्य कथा बिखरी हुई महसूस होती है।

इसके बावजूद ‘इंस्पेक्टर अविनाश 2’ उन दर्शकों के लिए मनोरंजक साबित हो सकती है जिन्हें देसी पुलिस ड्रामा और एक्शन पसंद है। रंदीप हुड्डा की दमदार मौजूदगी इस सीरीज को अंत तक बांधे रखती है।

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share