केनेडी फिल्म समीक्षा: राहुल भट ने अनुराग कश्यप के गहरे नॉयर थ्रिलर में अपनी उपस्थिति से कायम रखा आकर्षण
अनुराग कश्यप की फिल्म केनेडी धीमी गति और गहरे मूड वाली नॉयर है। राहुल भट की अभिनय प्रस्तुति फिल्म की ताकत है, लेकिन कहानी की धीमी रफ्तार निराश करती है।
अनुराग कश्यप की केनेडी एक मूड-आधारित, चरित्र-केंद्रित नीओ-नॉयर क्राइम थ्रिलर है, जिसमें राहुल भट ने बेहद प्रभावशाली प्रदर्शन दिया है। फिल्म धीरे-धीरे खुलती है और मुख्य पात्र के थके हुए और उदास नजरों में जीवन की भारी वास्तविकता को दिखाती है। सन्नी लियोन एक महत्वपूर्ण भूमिका में हैं, जो फिल्म में भावनात्मक गहराई जोड़ती हैं।
कहानी एक पूर्व पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे मृत घोषित कर दिया गया है लेकिन वह जीवित है और शहर में कॉन्ट्रैक्ट किलर के रूप में काम कर रहा है। वह लगभग नहीं सोता और बोलता भी कम है, जैसे जीवन में उसने बहुत कुछ देखा और अपेक्षाएँ कम रखी हों। फिल्म पारंपरिक थ्रिलर की तरह नहीं है, बल्कि यह चरित्र अध्ययन और अपराध-बोध तथा मोक्ष की संभावनाओं की कहानी है।
अनुराग कश्यप ने फिल्म में केनेडी की नींद और भावनात्मक सुन्नता महसूस कराने की कोशिश की है। लंबे सन्नाटे, धुंधली रोशनी और संवाद के बीच विराम इस प्रभाव को मजबूत करते हैं। तकनीकी रूप से फिल्म आकर्षक है; सिनेमा-ग्राफी, गीली सड़कों और शहर की धुंधली रोशनी फिल्म के गहरे वातावरण को जीवंत बनाती हैं। साउंड डिजाइन भी तनाव बढ़ाने में कारगर है।
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राहुल भट का अभिनय फिल्म की रीढ़ है। उनका प्रदर्शन अंतर्मुखी, नियंत्रित और सूक्ष्म है, जो पात्र की थकावट और नैतिक दुविधा को दर्शकों तक पहुंचाता है। सन्नी लियोन का शांत और प्राकृतिक अभिनय फिल्म के काले स्वर को नरम करता है।
फिर भी फिल्म की धीमी गति और कभी-कभी कहानी में भटकाव इसे पूरी तरह प्रभावशाली बनने नहीं देता। यह धीमे, मनोवैज्ञानिक नॉयर का आनंद लेने वालों के लिए उपयुक्त है।
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