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कोहरा सीजन 2 रिव्यू: बारुन सोबती और मोना सिंह की सीरीज धीमी गति का थ्रिलर, भावनाओं और रहस्यों में डूबी

कोहरा सीजन 2 धीमी गति का थ्रिलर है, जिसमें दुःख, टूटते रिश्ते और अनसुलझे मानसिक आघात पर ध्यान है। प्रदर्शन और वातावरण इसे मजबूती देते हैं।

कोहरा सीजन 2 अपने धीमे-धीमे उभरते कथानक के साथ लौट आया है, जिसमें दुःख, टूटते रिश्ते और अनसुलझे मानसिक आघात की भावनाओं पर केंद्रित कहानी है। यह छह एपिसोड वाली सीरीज पंजाब की पृष्ठभूमि में आधारित है और बारुन सोबती व मोना सिंह की प्रमुख भूमिकाओं के साथ प्रस्तुत की गई है।

सीजन 2 में बारुन सोबती फिर से इंस्पेक्टर अमरपाल गरुंडी की भूमिका में हैं, जो अब विवाहित हैं। अपने व्यक्तिगत जीवन की जटिलताओं से बचने के लिए उन्होंने दलरपुरा में ट्रांसफर ले लिया। वहीं मोना सिंह की भूमिका में नज़र आने वाली धानवंत कौर उनके नए बॉस के रूप में हैं। दोनों मिलकर पंजाब में एक रहस्यमय हत्या की जांच करते हैं। प्रीत नामक महिला को उनके घर के स्टेबल में बर्बर हत्या के शिकार पाया जाता है, और जांच उन्हें उसके पति और परिवार के जटिल संबंधों तक ले जाती है।

अभिनय की बात करें तो बारुन सोबती अपने गंभीर और हास्यपूर्ण अंदाज से कहानी में जान डालते हैं। मोना सिंह ने भी धानवंत कौर के चरित्र में गहराई और वास्तविकता जोड़ दी है। दोनों के बीच लैंगिक और मानसिक संवाद दर्शकों को प्रभावित करता है।

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सिनेमैटोग्राफी और निर्देशन की दृष्टि से, शो की धुंध (कोहरा) न केवल दृश्य में बल्कि कहानी और गति में भी महसूस होती है। हालांकि कुछ भावनाएं दोहराव वाली लग सकती हैं और गति कभी-कभी धीमी पड़ जाती है, लेकिन पूरे सीजन में रहस्य और वातावरण दर्शकों को बांधे रखते हैं।

अंत में, कोहरा सीजन 2 तेज़ थ्रिल या बड़े ट्विस्ट के बजाय धीमे, भावपूर्ण और गंभीर अनुभव देता है। जो दर्शक इसकी धुंध में बैठकर कहानी को महसूस करना पसंद करते हैं, उनके लिए यह सीजन भावनात्मक गहराई और स्थायी प्रभाव छोड़ता है।

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