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राजपाल यादव ने चेक बाउंस मामले में जमा किए 2 करोड़ रुपये, सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के दिए निर्देश

राजपाल यादव ने चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में दो करोड़ रुपये जमा किए। अदालत ने मध्यस्थता के निर्देश दिए और उचित शर्तों पर पासपोर्ट जारी करने को कहा।

बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। उनके वकील ने अदालत को बताया कि अभिनेता ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में 2 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं। इसके बाद शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश करने का निर्देश दिया। अदालत ने पेशेवर काम के लिए विदेश यात्रा की अनुमति देने के उद्देश्य से राजपाल का पासपोर्ट भी उचित शर्तों के साथ जारी करने का आदेश दिया।

यह मामला वर्ष 2012 में रिलीज हुई फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा है। इस फिल्म का निर्माण राजपाल यादव ने किया था, लेकिन यह बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही। इसके बाद भुगतान को लेकर विवाद और चेक बाउंस से जुड़े मामले सामने आए।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?

रुपये जमा किए जाने की जानकारी मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने संतोष जताया और दोनों पक्षों को मध्यस्थता के जरिए समाधान तलाशने को कहा। अदालत ने संकेत दिया कि वह मध्यस्थ नियुक्त करेगी। इसके बाद दोनों पक्षों को निर्धारित तारीख पर मध्यस्थ के सामने उपस्थित होना होगा।

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सुनवाई के दौरान राजपाल के वकील ने बताया कि अभिनेता पेशेवर काम के सिलसिले में विदेश जाना चाहते हैं, लेकिन उनका पासपोर्ट निचली अदालत के पास जब्त है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित ट्रायल कोर्ट को उचित शर्तों के अधीन पासपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया।

पहले अदालत ने दी थी अंतिम समयसीमा

सात अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को शिकायतकर्ता की बकाया राशि के भुगतान के लिए 13 अक्टूबर तक 2 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। उस सुनवाई में अभिनेता ने 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट पेश किया था। शेष 85 लाख रुपये उनकी संपत्ति के खरीदार के माध्यम से जमा किए जाने थे।

अदालत ने पहले भुगतान में देरी और बार-बार समय मांगे जाने पर कड़ा रुख अपनाया था। उसने चेतावनी दी थी कि निर्देशों का पालन नहीं करने पर सजा बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने कहा था कि कानून का इस तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

राजपाल यादव ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्हें चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में दोषी ठहराया गया था।

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