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सुबेदार मूवी रिव्यू: अनिल कपूर की दमदार अदाकारी, लेकिन कमजोर कहानी ने घटाया असर

सुरेश त्रिवेणी की फिल्म सुबेदार में अनिल कपूर की शानदार अदाकारी दिखती है, लेकिन कमजोर और बिखरी पटकथा के कारण फिल्म का प्रभाव सीमित रह जाता है।

निर्देशक सुरेश त्रिवेणी की फिल्म सुबेदार एक हिंदी क्राइम ड्रामा है, जो एक सेवानिवृत्त भारतीय सैन्य अधिकारी की कहानी बताती है। यह फिल्म प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई है और इसमें मुख्य भूमिका में अनिल कपूर नजर आते हैं। कहानी एक छोटे शहर में सेट है, जहां अवैध रेत माफिया का आतंक फैला हुआ है।

फिल्म में अनिल कपूर ने सुबेदार मेजर आदित्य मौर्य का किरदार निभाया है, जो भारतीय सेना से रिटायर होकर अपने घर लौटते हैं। उनका चरित्र गर्व और अपराधबोध के बीच झूलता नजर आता है। उन्हें अपने सैन्य जीवन पर गर्व है, लेकिन परिवार को पर्याप्त समय न दे पाने का पछतावा भी है। उनकी पत्नी अब जीवित नहीं हैं और उनकी बेटी श्यामा (राधिका मदान) के साथ उनका रिश्ता भी काफी तनावपूर्ण है।

फिल्म का मुख्य खलनायक प्रिंस (आदित्य रावल) है, जो रेत माफिया की सरगना बबली दीदी (मोना सिंह) का भाई है। प्रिंस एक घमंडी और हिंसक युवक है, जो पूरे शहर को अपना साम्राज्य मानता है। जब एक अनुशासित पूर्व सैनिक का सामना एक अपराधी के अहंकार से होता है, तब कहानी का मुख्य संघर्ष शुरू होता है।

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हालांकि फिल्म कई गंभीर मुद्दों को उठाने की कोशिश करती है, जैसे पिता-बेटी का तनावपूर्ण रिश्ता, कॉलेज में लैंगिक भेदभाव और बुलिंग, तथा अवैध खनन की समस्या। लेकिन इन सभी विषयों को फिल्म गहराई से नहीं दिखा पाती। कहानी कई उपकथाओं में उलझ जाती है, जिससे दर्शकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव कम हो जाता है।

फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी इसका अभिनय है। अनिल कपूर ने अपने किरदार में जबरदस्त तीव्रता दिखाई है। वहीं आदित्य रावल, राधिका मदान, सौरभ शुक्ला, मोना सिंह और फैजल मलिक भी अपने-अपने किरदारों में प्रभाव छोड़ते हैं।

कुल मिलाकर सुबेदार अच्छी मंशा वाली फिल्म है, लेकिन बिखरी हुई कहानी के कारण इसका प्रभाव अधूरा रह जाता है।

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