सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की उम्र में निधन, लता मंगेशकर समझे जाने वाले उनके 5 अमर गीत आज भी हैं लोकप्रिय
पद्म भूषण सम्मानित पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनकी कई लोकप्रिय रचनाएं अक्सर लता मंगेशकर के गीत समझी जाती थीं।
भारतीय संगीत जगत ने अपनी एक मधुर और सदाबहार आवाज खो दी है। प्रसिद्ध पार्श्व गायिका और पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित सुमन कल्याणपुर का रविवार, 31 मई को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्होंने अपने लोखंडवाला स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर है।
सुमन कल्याणपुर की मराठी जीवनी ‘सुमन सुगंध’ की लेखिका मंगला खाडिलकर ने बताया कि सुमन जी ने शांतिपूर्वक दुनिया को अलविदा कहा। अपने अंतिम दिनों में वह अपने ही गाए गीत सुन रही थीं।
दशकों लंबे अपने संगीत करियर में सुमन कल्याणपुर ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार गीत दिए। ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘मेरा प्यार भी तू है’, ‘तुमने पुकारा और हम चले आए’, ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से’ और ‘तुमसे ओ हसीना’ जैसे गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
दिलचस्प बात यह है कि उनकी आवाज की मिठास और शैली के कारण कई श्रोताओं को उनके गीत लता मंगेशकर के गाए हुए लगते थे। ऐसे पांच प्रसिद्ध गीत हैं जिन्हें अक्सर लोग लता मंगेशकर का गीत समझ बैठते थे—
- ना ना करते प्यार तुम्हीं से (जब जब फूल खिले)
- हाल-ए-दिल उनको सुनाना था (फ़रियाद, 1964)
- यूँ ही दिल ने चाहा था (दिल ही तो है, 1963)
- ना तुम हमें जानो (बात एक रात की, 1962)
- दिल एक मंदिर है (1963)
अपने करियर के दौरान लता मंगेशकर से तुलना पर सुमन कल्याणपुर ने कहा था कि उनकी आवाज जरूर मिलती-जुलती है, लेकिन संगीत के जानकार दोनों के बीच फर्क आसानी से पहचान सकते हैं। उन्होंने हमेशा अपनी अलग गायन शैली बनाए रखी और कभी किसी की नकल नहीं की।
सुमन कल्याणपुर अपने पीछे अपनी बेटी चारू को छोड़ गई हैं। उनके गीत भारतीय संगीत की धरोहर के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे।