राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार आर. सरथ का 65 वर्ष की उम्र में निधन, पीछे छोड़ गए शानदार सिनेमाई विरासत
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार आर. सरथ का 65 वर्ष की उम्र में तिरुवनंतपुरम में निधन हो गया। उन्होंने मलयालम सिनेमा, सांस्कृतिक शोध और संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार, पटकथा लेखक और सांस्कृतिक प्रशासक आर. सरथ का सोमवार, 7 सितंबर को 65 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित केआईएमएस अस्पताल में किडनी संबंधी बीमारी का इलाज करा रहे थे। सरथ का जन्म केरल के कोल्लम जिले के पुनालूर में हुआ था।
‘सायाह्नम’ से शुरू किया फिल्मी सफर
आर. सरथ ने वर्ष 2000 में मलयालम फिल्म ‘सायाह्नम’ से निर्देशक और पटकथा लेखक के रूप में फिल्म जगत में कदम रखा। फिल्म ने सात केरल राज्य फिल्म पुरस्कारों के साथ सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। वर्ष 2001 में ‘सायाह्नम’ को म्यूनिख अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के प्रतियोगिता खंड में भी प्रदर्शित किया गया।
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इसके बाद उन्होंने 2003 में ‘स्थिति’ बनाई, जिसे बैंकॉक अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित किया गया। वर्ष 2006 में आई ‘शीलावती’ में कई गंभीर सामाजिक मुद्दों को उठाया गया और इसका प्रीमियर ताइवान में एशिया पैसिफिक फिल्म महोत्सव में हुआ।
सरथ ने 2011 में भारत-चीन सह-निर्माण वाली हिंदी फिल्म ‘द डिजायर: ए जर्नी ऑफ अ वुमन’ का निर्देशन और सह-लेखन किया। उनकी फिल्मोग्राफी में 2012 की ‘पैराडाइज’ भी शामिल थी, जिसे मैक्सिको और एम्स्टर्डम के अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में पुरस्कार मिले।
सांस्कृतिक शोध में भी अहम योगदान
फिल्मों के अलावा सरथ सांस्कृतिक संरक्षण और शोध से भी जुड़े रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित डॉक्यूमेंट्री ‘द पेंटेड एपिक्स’ पर काम करते हुए उन्होंने किलुनूर मंदिर में राजा रवि वर्मा से संबंधित दुर्लभ भित्तिचित्रों की खोज की। इस शोध के लिए उन्हें 1996 में भारत सरकार के संस्कृति विभाग की जूनियर फेलोशिप मिली।
अपने करियर में सरथ को नौ अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और चार केरल राज्य फिल्म पुरस्कार मिले।
प्रशासनिक क्षेत्र में भी सक्रिय रहे
सरथ ने केरल के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में उपनिदेशक के रूप में काम किया। बाद में वह संस्कृति विभाग के तहत एमपीसीसी के निदेशक बने। उन्होंने भारत भवन के सचिव के रूप में भी राज्य की सांस्कृतिक गतिविधियों में योगदान दिया।
अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर सरथ ने फिल्म निर्माण और पत्रकारिता का औपचारिक प्रशिक्षण लिया था। उनके निधन से मलयालम सिनेमा के साथ-साथ सांस्कृतिक शोध और संरक्षण के क्षेत्र को भी बड़ी क्षति हुई है।
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