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दिग्गज संगीतकार एस.पी. वेंकटेश का निधन, मलयालम सिनेमा ने खोया एक युग

दिग्गज संगीतकार एस.पी. वेंकटेश का 70 वर्ष की उम्र में चेन्नई में निधन हो गया। मलयालम सिनेमा के संगीत को नई पहचान देने वाले कलाकार का युग समाप्त हुआ।

मलयालम सिनेमा के दिग्गज और अनुभवी संगीत निर्देशक एस.पी. वेंकटेश का मंगलवार, 3 फरवरी को चेन्नई में निधन हो गया। वह 70 वर्ष के थे। रिपोर्ट के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार बुधवार को चेन्नई के अलापक्कम में किया जाएगा। खबर लिखे जाने तक उनके निधन के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी थी।

एस.पी. वेंकटेश का करियर कई दशकों और भाषाओं में फैला रहा, लेकिन उनकी पहचान मुख्य रूप से मलयालम फिल्म उद्योग से जुड़ी रही। ऐसे समय में जब मलयालम सिनेमा का संगीत बदलाव के दौर से गुजर रहा था, वेंकटेश का योगदान बेहद अहम साबित हुआ और उन्होंने फिल्म संगीत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने अपने संगीत सफर की शुरुआत 1960 के दशक के अंत में तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों के लिए ऑर्केस्ट्रा में काम करते हुए की। लंबे समय तक पर्दे के पीछे काम करने के बाद, उन्होंने 1981 में तेलुगु फिल्म प्रेमा युद्ध से स्वतंत्र संगीत निर्देशक के रूप में शुरुआत की। इसके बाद उन्हें खासतौर पर मलयालम सिनेमा में व्यापक पहचान मिली और 1980 व 1990 के दशक में वह सबसे लोकप्रिय संगीतकारों में शामिल हो गए।

इस दौरान उन्होंने डेनिस जोसेफ, थम्पी कन्ननथनम और जोशी जैसे चर्चित फिल्मकारों के साथ काम किया। राजाविंटे माकन, किलुक्कम, जॉनी वॉकर, ध्रुवम, वलसल्यं, कबूलिवाला, मिन्नारम, मन्नार मथाई स्पीकिंग और स्पडिकम जैसी फिल्मों का संगीत आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है।

गीतों के अलावा, वेंकटेश ने अपने प्रभावशाली बैकग्राउंड स्कोर से भी खास पहचान बनाई। नो. 20 मद्रास मेल, देवासुरम, चंद्रलेखा और कक्काकुयिल जैसी फिल्मों में उनका बैकग्राउंड म्यूज़िक यादगार रहा। वर्ष 1993 में उन्हें पैत्रुकम और जनम फिल्मों के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का केरल राज्य फिल्म पुरस्कार मिला।

उनके निधन से मलयालम सिनेमा ने एक ऐसे संगीतकार को खो दिया है, जिनके सुरों ने एक पूरे दौर को परिभाषित किया।

 
 
 
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