दिग्गज अभिनेत्री सौकार जानकी का 94 साल की उम्र में निधन, चेन्नई में ली अंतिम सांस
दिग्गज अभिनेत्री सौकार जानकी का 94 वर्ष की उम्र में चेन्नई में निधन हो गया। सात दशक लंबे करियर में उन्होंने 400 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर पहचान बनाई।
दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री सौकार जानकी का शुक्रवार, 21 अगस्त को चेन्नई में 94 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें कुछ दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
नादिगर संगम के अध्यक्ष और अभिनेता नासर ने उनके निधन की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सौकार जानकी का निधन दोपहर 1 बजकर 59 मिनट पर हुआ। अभिनेत्री के पार्थिव शरीर को शाम 5 बजे से तेयनामपेट में रखा जाएगा, जहां फिल्म जगत से जुड़े लोग, प्रशंसक और उनके करीबी अंतिम दर्शन कर सकेंगे।
सीने में तेज दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती
सौकार जानकी की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें चेन्नई के अलवरपेट स्थित कावेरी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 19 अगस्त को अभिनेता कायल देवराज ने उनकी तबीयत को लेकर जानकारी साझा की थी और बताया था कि अभिनेत्री का गहन चिकित्सा देखभाल में इलाज चल रहा है।
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नासर के अलावा अभिनेता साउंडराजा और हेमचंद्रन ने भी अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल जाना था। इलाज के बावजूद शुक्रवार को उनका निधन हो गया।
सात दशक से ज्यादा लंबा रहा फिल्मी सफर
सौकार जानकी का जन्म शंकरमांची जानकी के रूप में हुआ था। उन्होंने 1950 में निर्देशक एलवी प्रसाद की तेलुगु फिल्म शवुकारु से फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसी फिल्म के नाम से उन्हें ‘सौकार’ नाम मिला, जो आगे चलकर उनकी पहचान बन गया।
1952 में उन्होंने तमिल फिल्म वलयापति से तमिल सिनेमा में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में काम किया। उनके खाते में 400 से अधिक फिल्मों में अभिनय का श्रेय बताया जाता है।
वह निर्देशक के. बालाचंदर के साथ भी लंबे समय तक काम करती रहीं। नीरकुमिझी, एधिर नीचल, इरु कोडुगल और काव्या थलैवी जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया। पुधिया परवई, थिल्लू मुल्लू और हे राम भी उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल हैं।
पद्मश्री से हुईं सम्मानित
सौकार जानकी ने उम्र के अंतिम पड़ाव तक अभिनय जारी रखा। उनकी आखिरी तमिल फिल्म बिस्कोथ 2020 में रिलीज हुई थी। इसके बाद वह 2023 में आई तेलुगु फिल्म अन्नी मंची शकुनामुले में भी नजर आईं।
उन्हें 1969 में कलैमामणि सम्मान और 2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उनका निधन भारतीय सिनेमा में सात दशक से अधिक लंबे एक शानदार अभिनय सफर का अंत है।