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बढ़ती ऋण मांग से बैंकिंग प्रणाली की तरलता तीन सप्ताह के निचले स्तर पर, एफसीएनआर(बी) निवेश से राहत की उम्मीद

बढ़ती ऋण मांग के कारण बैंकिंग प्रणाली की अतिरिक्त तरलता घटकर तीन सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गई है। एफसीएनआर(बी) के तहत विदेशी मुद्रा प्रवाह से जल्द सुधार की उम्मीद है।

देश की बैंकिंग प्रणाली में उपलब्ध अतिरिक्त तरलता (लिक्विडिटी) बढ़ती ऋण मांग के कारण तीन सप्ताह से अधिक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बैंकों में ऋण वितरण की रफ्तार जमा वृद्धि की तुलना में अधिक रहने से नकदी अधिशेष में कमी दर्ज की गई है।

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को बैंकिंग प्रणाली का शुद्ध तरलता अधिशेष 2,884 करोड़ रुपये रहा, जो 29 जून के बाद सबसे निचला स्तर है। 29 जून को बैंकिंग प्रणाली में 13,077 करोड़ रुपये की तरलता कमी दर्ज की गई थी।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि तरलता में गिरावट का प्रमुख कारण जमा की तुलना में ऋण वृद्धि का तेज होना है। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई के संभावित हस्तक्षेप का भी असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि आरबीआई की मौजूदा आरक्षित स्थिति के आंकड़े आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

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बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहों में बैंकिंग प्रणाली की तरलता में सुधार देखने को मिल सकता है। इसका प्रमुख कारण एफसीएनआर (बी) योजना के तहत आने वाली विदेशी मुद्रा का भारतीय रुपये में परिवर्तित होना होगा। जैसे ही ये डॉलर रुपये में बदले जाएंगे, बैंकिंग प्रणाली में स्वतः नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और वर्तमान दबाव कम होगा।

एक निजी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख के अनुसार, सरकार के पास इस समय बड़ी मात्रा में नकदी अधिशेष भी मौजूद है, जिससे बाजार में तरलता कुछ समय के लिए सीमित बनी हुई है। हालांकि, उनका मानना है कि यदि एफसीएनआर(बी) के तहत आने वाले लगभग 20 अरब डॉलर का रुपयों में रूपांतरण होता है, तो इससे बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी उपलब्ध होगी और तरलता की मौजूदा स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

आरबीआई के अनुसार, 17 जुलाई तक कुल 20.72 अरब डॉलर का विदेशी निवेश इस व्यवस्था के तहत प्राप्त हुआ। इसमें 17.4 अरब डॉलर एफसीएनआर(बी) जमा, 1.97 अरब डॉलर विदेशी मुद्रा ऋण तथा 1.34 अरब डॉलर बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) के माध्यम से आए।

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