पांच राज्यों में 11 हजार करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी, सात व्यस्त कॉरिडोर होंगे फोर-लेन
केंद्र सरकार ने पांच राज्यों में करीब 11 हजार करोड़ रुपये की रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इससे क्षमता बढ़ेगी, भीड़ घटेगी और यात्री- माल परिवहन बेहतर होगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने देश के पांच राज्यों में करीब 11 हजार करोड़ रुपये की रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों पर परिचालन को सुचारु बनाना, ट्रेनों की क्षमता बढ़ाना और रेल नेटवर्क पर बढ़ते दबाव को कम करना है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि सात हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को फोर-लेन करने और मौजूदा नेटवर्क को चौगुना करने की योजना है। इनमें दिल्ली-हावड़ा, हावड़ा-मुंबई, दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-गुवाहाटी, दिल्ली-चेन्नई, हावड़ा-चेन्नई और मुंबई-चेन्नई मार्ग शामिल हैं।
इन परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना और एकीकृत योजना के जरिए लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
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परियोजनाओं से पांच राज्यों के 14 जिले लाभान्वित होंगे। करीब 4,790 गांवों में रेल संपर्क और परिवहन व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। इन गांवों की संयुक्त आबादी लगभग 56 लाख है।
दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर के तहत कानपुर, प्रयागराज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर, पटना और आसनसोल जैसे प्रमुख शहर जुड़े हैं। दिल्ली-मुंबई मार्ग मथुरा, कोटा, रतलाम, वडोदरा और सूरत से होकर गुजरता है। दिल्ली-चेन्नई कॉरिडोर में आगरा, ग्वालियर, झांसी, भोपाल, नागपुर और विजयवाड़ा जैसे शहर शामिल हैं। मुंबई-चेन्नई मार्ग में पुणे भी महत्वपूर्ण केंद्र है।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अतिरिक्त रेल ट्रैक बनने से यात्री और मालगाड़ियों के संचालन के लिए अधिक क्षमता उपलब्ध होगी। इससे भविष्य में बढ़ने वाले यातायात को संभालने में भी मदद मिलेगी।
इन मार्गों से कोयला, सीमेंट, लौह और इस्पात जैसी वस्तुओं की ढुलाई होती है। क्षमता बढ़ाने से करीब 27 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होने की उम्मीद है।
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