पनामा नहर फैसले के बाद चीन ने कंपनियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की चेतावनी दी
पनामा की अदालत द्वारा सीके हचिसन की रियायत रद्द करने पर चीन ने कड़ा रुख अपनाया है और कहा है कि वह अपनी कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
चीन ने कहा है कि वह अपनी कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए “आवश्यक कदम” उठाएगा। यह बयान पनामा की सर्वोच्च अदालत के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें हांगकांग स्थित सीके हचिसन (CK Hutchison) को पनामा नहर के अहम बंदरगाहों के संचालन की अनुमति देने वाली रियायत (कनसेशन) को रद्द कर दिया गया।
बीजिंग ने शुक्रवार (30 जनवरी, 2026) को स्पष्ट किया कि पनामा की अदालत का यह निर्णय चीनी कंपनियों के वैध अधिकारों और हितों को प्रभावित करता है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीनी पक्ष अपनी कंपनियों के कानूनी और वैध हितों की पूरी मजबूती से रक्षा करेगा।
चीन ने यह भी बताया कि सीके हचिसन ने स्वयं इस फैसले को कानूनी आधार से रहित बताया है। कंपनी का कहना है कि पनामा की शीर्ष अदालत का यह निर्णय न केवल अनुबंध की शर्तों के विपरीत है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के स्थापित नियमों को भी कमजोर करता है।
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पनामा नहर वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत रणनीतिक महत्व रखती है और इसके बंदरगाहों का संचालन अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और लॉजिस्टिक्स में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इस रियायत को रद्द किए जाने को चीन अपने व्यावसायिक हितों पर सीधा प्रभाव मान रहा है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया कि वह इस मामले पर आगे की स्थिति का आकलन करेगा और जरूरत पड़ने पर राजनयिक तथा अन्य उपयुक्त उपायों पर विचार करेगा। हालांकि, बीजिंग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि “आवश्यक कदम” से उसका आशय किन ठोस कार्रवाइयों से है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर चीन-पनामा संबंधों और व्यापक रूप से अंतरराष्ट्रीय निवेश माहौल पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर चीन की आगे की रणनीति और पनामा सरकार की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।
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