एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व बदलाव की तैयारी, नए एमडी-सीईओ के लिए आरबीआई को भेजे जाएंगे दो नाम
एचडीएफसी बैंक बोर्ड ने नए एमडी-सीईओ के लिए दो नाम आरबीआई को भेजने का फैसला किया। जिमी टाटा और वी. श्रीनिवास रंगन से जुड़े महत्वपूर्ण नेतृत्व बदलाव भी हुए।
एचडीएफसी बैंक में शीर्ष प्रबंधन को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बैंक के बोर्ड ने नए मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (एमडी-सीईओ) की नियुक्ति के लिए दो उम्मीदवारों के नाम भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को भेजने का फैसला किया है। दोनों नाम प्राथमिकता के क्रम में भेजे जाएंगे। हालांकि, बैंक ने अभी उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।
बैंक ने शनिवार को हुई बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। दोनों उम्मीदवारों के लिए तीन साल के कार्यकाल का प्रस्ताव है। स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के अनुसार, यह निर्णय गवर्नेंस, नॉमिनेशन और रेम्यूनरेशन कमिटी की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। प्रस्तावित वेतन और अन्य पारिश्रमिक का विवरण भी आरबीआई की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अंतिम नियुक्ति केंद्रीय बैंक की मंजूरी के बाद ही होगी।
जिमी टाटा बनेंगे एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर
बोर्ड ने जिमी टाटा को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त करने को भी मंजूरी दी है। उनका कार्यकाल आरबीआई की मंजूरी मिलने की तारीख से तीन साल का होगा। जिमी टाटा को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में 35 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह वर्ष 1994 से एचडीएफसी बैंक से जुड़े हैं और फिलहाल चीफ क्रेडिट ऑफिसर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले वह चीफ रिस्क ऑफिसर भी रह चुके हैं।
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वी. श्रीनिवास रंगन की पुनर्नियुक्ति
बोर्ड ने वी. श्रीनिवासा रंगन को पूर्णकालिक निदेशक के रूप में दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी दी है। उन्हें 23 नवंबर 2026 से 22 नवंबर 2027 तक एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर बनाए रखने का प्रस्ताव है। यह नियुक्ति भी नियामकीय मंजूरियों के अधीन होगी। 66 वर्षीय रंगन के पास मानव संसाधन, कॉरपोरेट लीगल, ग्रुप ओवरसाइट, निवेश बैंकिंग, सूचना सुरक्षा, फ्रॉड और विजिलेंस जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी है।
बोर्ड में बढ़ेंगे पूर्णकालिक निदेशक
एचडीएफसी बैंक ने बोर्ड में एक अतिरिक्त पूर्णकालिक निदेशक का पद बनाने को भी मंजूरी दी है। इससे एमडी-सीईओ को छोड़कर पूर्णकालिक निदेशकों की संख्या चार हो जाएगी। बैंक का कहना है कि इससे बैंक और उसकी सहायक कंपनियों के बीच निगरानी व तालमेल बेहतर होगा तथा नेतृत्व विकास और उत्तराधिकार योजना को मजबूती मिलेगी।
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