भारत ने तेज और प्रतिस्पर्धी व्यापार के लिए एयर कार्गो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क का किया विस्तार
भारत ने एयर कार्गो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क का विस्तार कर प्रक्रियाएं सरल कीं, जिससे ट्रांजिट समय, भीड़ और लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी तथा भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।
भारत सरकार ने माल ढुलाई को तेज, अधिक कुशल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से अपने एयर कार्गो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क का विस्तार किया है। सरकार ने ट्रांसशिपमेंट कार्गो और डाक की हैंडलिंग तथा सुरक्षा से जुड़े ढांचे में संशोधन किया है, जिससे देश की आपूर्ति श्रृंखला और व्यापारिक प्रक्रियाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
संशोधित व्यवस्था में कार्गो की आवाजाही की सभी चार श्रेणियों को शामिल किया गया है। इनमें अंतरराष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय से घरेलू, घरेलू से अंतरराष्ट्रीय और घरेलू से घरेलू कार्गो परिवहन शामिल है।
नई प्रणाली के तहत माल को विशेष ट्रांसफर कार्गो सिक्योरिटी होल्ड एरिया के माध्यम से संसाधित किया जा सकेगा। जिस कार्गो की मूल स्थान पर पहले ही सुरक्षा जांच हो चुकी है, उसे निर्धारित सुरक्षा मानकों और साझेदार देशों के साथ सुरक्षा-समकक्ष व्यवस्था के आधार पर दोबारा स्क्रीनिंग से छूट दी जा सकती है।
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सरकार का उद्देश्य कार्गो टर्मिनलों पर भीड़ कम करना, माल के ठहराव समय को घटाना और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी लाना है। साथ ही, इससे सुरक्षा एजेंसियां अपने संसाधनों को उच्च जोखिम वाली खेपों की जांच पर अधिक प्रभावी ढंग से केंद्रित कर सकेंगी।
इस सुव्यवस्थित प्रक्रिया का असर चेन्नई-दिल्ली-फ्रैंकफर्ट मार्ग पर पहले ही दिखाई देने लगा है। इस रूट पर कार्गो का ट्रांजिट समय पहले लगभग 50 से 60 घंटे था, जो घटकर करीब 20 घंटे रह गया है।
आज से शुरू होने वाले विस्तारित पायलट प्रोजेक्ट के तहत बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद और मुंबई को घरेलू मूल स्टेशनों के रूप में नेटवर्क में जोड़ा जाएगा। वहीं, लंदन और कोपेनहेगन को अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों में शामिल किया जाएगा।
भारत 12 देशों के साथ सुरक्षा-समकक्ष व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है। इनमें यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, जापान, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया प्रमुख हैं।
विस्तारित पायलट परियोजना से भारत को क्षेत्रीय एयर कार्गो हब के रूप में मजबूत करने, व्यापार को गति देने, आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाने और निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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