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भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र में तकनीक-आधारित बदलाव, मूल्य संवर्धन बनेगा भविष्य की वृद्धि का आधार: सरकार

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र अब पारंपरिक उत्पादन से आगे बढ़कर मूल्य संवर्धन, मोबाइल मार्केटिंग और तकनीक-आधारित उद्यमों की ओर बढ़ रहा है।

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र अब पारंपरिक उत्पादन की सीमाओं से आगे बढ़कर मूल्य संवर्धित प्रसंस्करण, मोबाइल मार्केटिंग और तकनीक-आधारित उद्यमों की दिशा में अग्रसर है। मंत्रालय ने कहा कि इस क्षेत्र की भविष्य की वृद्धि मजबूत बाज़ार-उन्मुख मूल्य शृंखलाओं, बेहतर रसद व्यवस्था और सतत बाज़ार विकास पर निर्भर करेगी।

बयान में बताया गया कि भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र एक तकनीक-संचालित उद्योग के रूप में उभर रहा है, जो खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका, रोजगार और निर्यात आय को मजबूती दे रहा है। मंत्रालय के अनुसार, यह क्षेत्र मूल्य संवर्धन, कोल्ड-चेन विकास, आधुनिक प्रसंस्करण, मोबाइल मार्केटिंग और स्टार्टअप-आधारित नवाचारों के ज़रिए बड़े बदलाव से गुजर रहा है।

मंत्रालय ने कहा, "उद्यम अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), ब्लॉकचेन, ड्रोन तकनीक, स्मार्ट कोल्ड चेन सिस्टम और प्रिसिजन एक्वाकल्चर जैसी आधुनिक तकनीकों को तेज़ी से अपना रहे हैं, ताकि ट्रेसेबिलिटी, उत्पादकता, गुणवत्ता आश्वासन और फसल-उपरांत प्रबंधन में सुधार हो सके।" मंत्रालय ने यह भी जोड़ा कि इन पहलों से नुकसान कम हो रहा है, लाभप्रदता बढ़ रही है और मत्स्य पालन मूल्य शृंखला मजबूत हो रही है।

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मंत्रालय के अनुसार, "मूल्य संवर्धन भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र को प्राथमिक उत्पादन गतिविधि से एक विविधीकृत और बाज़ार-उन्मुख उद्यम में बदलने के महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में उभर रहा है।" मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि इस बदलाव को कई सार्वजनिक निवेशों और लक्षित नीतिगत पहलों का समर्थन प्राप्त है।

इस क्षेत्र के विकास के लिए सरकार ने ब्लू रिवॉल्यूशन स्कीम, मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई), प्रधानमंत्री मत्स्य समृद्धि योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जैसी प्रमुख योजनाओं के माध्यम से 39,272 करोड़ रुपये देने की प्रतिबद्धता जताई है।

इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने बताया कि 3,393.85 करोड़ रुपये के निवेश से 46,500 सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिनमें मछली परिवहन प्रणाली, खुदरा और थोक मछली बाज़ार, कियोस्क, फीड मिल, बर्फ संयंत्र, कोल्ड स्टोरेज और मूल्य संवर्धित उद्यम इकाइयां शामिल हैं। साथ ही, पांच आधुनिक, स्मार्ट मछली बाज़ार भी विकसित किए जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि महिलाएं भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र में, विशेष रूप से फसल-उपरांत कार्यों और लघु उद्यमों में, एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरी हैं, जहां मूल्य संवर्धन ने आय सृजन और उद्यमिता के नए अवसर खोले हैं।

मंत्रालय ने कहा कि भारतीय मत्स्य पालन क्षेत्र का भविष्य केवल मछली उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि मजबूत और बाज़ार-उन्मुख मूल्य शृंखलाओं के निर्माण पर भी निर्भर करेगा, जो नवाचार, परिवहन, प्रसंस्करण और सतत बाज़ार विकास के माध्यम से मछुआरों और मत्स्य किसानों को उपभोक्ताओं से जोड़ें।

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