भारत और पोलैंड 2030 तक दोगुना करेंगे व्यापार, रक्षा और तकनीक सहयोग को मिलेगी मजबूती
भारत और पोलैंड ने 2030 तक व्यापार दोगुना करने तथा रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वपूर्ण खनिज, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और संपर्क सुविधाओं में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारत और पोलैंड ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के बीच गुरुवार को हुई बातचीत में रक्षा, उभरती प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिजों और संपर्क सुविधाओं में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
दोनों देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान में भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को ठोस, समयबद्ध और पारस्परिक लाभ वाले परिणामों में बदलने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। दोनों पक्षों ने रक्षा उद्योग संवाद शुरू करने और आतंकवाद विरोधी मुद्दों पर बातचीत करने का भी फैसला किया।
डोनाल्ड टस्क 21 से 23 अक्टूबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। उनके साथ लगभग 100 प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधियों सहित एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल आया है।
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दोनों नेताओं ने अगस्त 2024 में नरेंद्र मोदी की पोलैंड यात्रा के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की। उस दौरान दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था और 2024-2028 के लिए कार्ययोजना अपनाई गई थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पोलैंड के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोर्स्की ने सितंबर में इस कार्ययोजना की मध्यावधि समीक्षा की थी।
व्यापार, निवेश और तकनीक पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने पोलिश कंपनियों को भारत में निवेश और कारोबार बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने भारत के विशाल बाजार, कुशल कार्यबल और विनिर्माण एवं नवाचार के बढ़ते अवसरों का उल्लेख किया। वहीं, टस्क ने पोलैंड को मध्य और पूर्वी यूरोप के बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए भारतीय कंपनियों का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बताया।
दोनों देशों ने औद्योगिक मशीनरी, रक्षा, बुनियादी ढांचे, दवा, खनन, ऊर्जा और सूचना प्रौद्योगिकी में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीक में संयुक्त शोध तथा स्टार्टअप सहयोग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
रक्षा और रणनीतिक सहयोग
रक्षा क्षेत्र में नियमित संवाद जारी रखने और तकनीक के संयुक्त विकास एवं उत्पादन की संभावनाएं तलाशने पर सहमति बनी। साइबर सुरक्षा, रक्षा नवाचार और महत्वपूर्ण उभरती तकनीकों को प्राथमिकता दी जाएगी। दोनों देश गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा और आदान-प्रदान से संबंधित समझौते पर भी जल्द हस्ताक्षर करने की उम्मीद कर रहे हैं।
शिक्षा, संपर्क और वैश्विक मुद्दे
दोनों देशों ने सीधी उड़ानों की संभावनाएं तलाशने, विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग, छात्र विनिमय और संयुक्त शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया। समुद्री सुरक्षा, बंदरगाहों और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे के माध्यम से संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
वैश्विक मुद्दों पर भारत और पोलैंड ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार तथा स्थायी और अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने का समर्थन किया। दोनों ने आतंकवाद की निंदा करते हुए आतंकवादी नेटवर्क और वित्तपोषण के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता जताई। यूक्रेन युद्ध पर भी दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की अपील की।
जलवायु और ऊर्जा क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ तकनीक तथा आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे पर सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई गई। यात्रा के अंत में टस्क ने प्रधानमंत्री मोदी को पोलैंड आने का निमंत्रण दिया।
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