भारत-रूस ऊर्जा कारोबार में बदलाव, अगस्त में रूसी तेल आपूर्ति 59% घटी
अगस्त में भारत को रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति 59 प्रतिशत घटी, जबकि रूस ने रिफाइनरियों पर हमलों के बीच भारत से पेट्रोल आयात किया, जिससे ऊर्जा व्यापार में बदलाव दिखा।
भारत और रूस के बीच ऊर्जा कारोबार में अगस्त 2026 के दौरान महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला। एसएंडपी ग्लोबल के अनुसार, भारत को रूस की कच्चे तेल की आपूर्ति 59 प्रतिशत घटकर करीब 8.10 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। यह पिछले वर्ष की तुलना में भी 38 प्रतिशत कम है।
जुलाई में भारत के कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी आधे से अधिक थी। हालांकि, अगस्त में आपूर्ति में तेज गिरावट आई। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे केवल यूक्रेनी हमलों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। भारतीय मांग, रूसी तेल की उपलब्धता और अन्य खरीदारों के बीच प्रतिस्पर्धा जैसे कारक भी मासिक आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं।
एसएंडपी ग्लोबल के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में रूस के यूराल्स क्रूड निर्यात में जुलाई की तुलना में 12 प्रतिशत की गिरावट आई। वहीं, नोवोरोस्सिय्स्क और तुआप्से के काला सागर टर्मिनलों से कच्चे तेल का निर्यात 55 प्रतिशत घटा। इन केंद्रों को यूक्रेनी ड्रोन हमलों से नुकसान पहुंचा है।
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इस बीच, ऊर्जा कारोबार में असामान्य उलटा प्रवाह भी देखने को मिला। रूस की रिफाइनरियों पर हमलों के कारण मॉस्को ने भारत से पेट्रोल मंगाया। अगस्त में भारत ने रूस को करीब 1.2 लाख टन पेट्रोल भेजा, जो रूस के कुल पेट्रोल आयात का लगभग 94 प्रतिशत था।
ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (सीआरईए) के अनुसार, अगस्त के अंत तक रूस की लगभग आधी रिफाइनिंग क्षमता बंद थी।
यूक्रेन ने मई से रूस की 40 से अधिक तेल और गैस सुविधाओं को निशाना बनाया है। इनमें रिफाइनरी, भंडारण केंद्र और निर्यात टर्मिनल शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, अगस्त के अंत तक केवल पांच प्रमुख रूसी रिफाइनरियां यूक्रेनी ड्रोन हमलों से अछूती थीं।
इन घटनाक्रमों से भारत-रूस ऊर्जा व्यापार की दिशा में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, हालांकि भारतीय तेल आयात पर यूक्रेनी हमलों का दीर्घकालिक प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है।
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