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नवंबर 2025 में भारत का रूसी तेल आयात 6 महीने के उच्च स्तर पर, अमेरिकी तेल खरीद में भी तेज़ उछाल

नवंबर 2025 में भारत का रूसी तेल आयात छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा, वहीं अमेरिकी तेल खरीद भी तेज़ी से बढ़ी। रूस और अमेरिका मिलकर भारत के लगभग आधे तेल आयात के स्रोत बने।

नवंबर 2025 में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात मात्रा और मूल्य—दोनों के लिहाज से पिछले छह महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर 35 प्रतिशत हो गई। यह ऐसे समय में हुआ है जब भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित टैरिफ समझौते को अंतिम रूप देने में खास प्रगति नहीं हो सकी है।

दिलचस्प बात यह है कि रूस से तेल आयात बढ़ने के साथ-साथ भारत ने अमेरिका से भी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि की है। नवंबर 2025 में अमेरिकी तेल आयात सात महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इस अवधि में भारत के कुल तेल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 13 प्रतिशत रही।

आंकड़ों से स्पष्ट है कि नवंबर 2025 में रूस और अमेरिका मिलकर भारत के लगभग आधे तेल आयात की आपूर्ति कर रहे थे। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में विविधता लाने की नीति को दर्शाता है, जिसमें देश विभिन्न स्रोतों से कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है।

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रूस से रियायती दरों पर मिलने वाला कच्चा तेल भारत के लिए लागत के लिहाज से लाभकारी रहा है, खासकर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच। वहीं, अमेरिका से तेल आयात बढ़ाना भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को भी मजबूत करता है, भले ही व्यापारिक टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर बातचीत अभी पूरी नहीं हुई हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और अमेरिका—दोनों से आयात बढ़ाकर भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को संतुलित कर रहा है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में संभावित आपूर्ति जोखिमों से भी खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है। आने वाले महीनों में भारत की तेल आयात नीति पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों और कूटनीतिक समीकरणों का असर बना रह सकता है।

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