केंद्र ने 25 लाख टन गेहूं निर्यात को दी मंजूरी, अतिरिक्त चीनी शिपमेंट की भी अनुमति
केंद्र सरकार ने 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी निर्यात की मंजूरी दी है, जिससे किसानों को लाभ और घरेलू आपूर्ति संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
केंद्र सरकार ने घरेलू उपलब्धता और कीमतों की व्यापक समीक्षा के बाद 25 लाख मीट्रिक टन (LMT) गेहूं तथा 5 LMT अतिरिक्त गेहूं उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दे दी है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में यह जानकारी दी।
मंत्रालय के अनुसार देश में पर्याप्त भंडार, बाजार में कीमतों में नरमी, बेहतर उत्पादन की संभावना और पीक सीजन के दौरान किसानों को औने-पौने दाम पर फसल बेचने से बचाने की जरूरत को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। सरकार का मानना है कि गेहूं और उसके उत्पादों के निर्यात से घरेलू कीमतों में स्थिरता आएगी, बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा, भंडारण प्रबंधन बेहतर होगा और किसानों की आय को मजबूती मिलेगी, जबकि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
वर्ष 2025–26 के दौरान निजी क्षेत्र के पास गेहूं का स्टॉक लगभग 75 LMT है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 32 LMT अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि देश में गेहूं की आपूर्ति की स्थिति आरामदायक बनी हुई है।
और पढ़ें: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पीयूष गोयल: अमेरिका बना सबसे पसंदीदा निर्यात बाजार
फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के केंद्रीय पूल में 1 अप्रैल 2026 तक कुल गेहूं उपलब्धता लगभग 182 LMT रहने का अनुमान है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि निर्यात की अनुमति से घरेलू खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
रबी 2026 सीजन में गेहूं का रकबा बढ़कर लगभग 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 328.04 लाख हेक्टेयर था। यह वृद्धि न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद व्यवस्था के कारण किसानों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
इसके साथ ही सरकार ने चालू 2025–26 चीनी सत्र के दौरान अतिरिक्त 5 LMT चीनी निर्यात को भी मंजूरी दी है। इससे कुल स्वीकृत चीनी निर्यात 20 LMT हो गया है। इससे पहले 14 नवंबर 2025 के आदेश के तहत 15 LMT चीनी निर्यात की अनुमति दी गई थी।
31 जनवरी 2026 तक लगभग 1.97 LMT चीनी का निर्यात हो चुका है, जबकि करीब 2.72 LMT के निर्यात अनुबंध किए जा चुके हैं। अतिरिक्त 5 LMT का कोटा इच्छुक चीनी मिलों को प्रोराटा आधार पर दिया जाएगा। शर्त यह होगी कि आवंटित मात्रा का कम से कम 70 प्रतिशत 30 जून 2026 तक निर्यात करना अनिवार्य होगा। मिलों को आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर अपनी सहमति देनी होगी और आवंटित कोटा किसी अन्य मिल को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा।
सरकार का कहना है कि यह फैसला देश में अधिशेष चीनी के प्रभावी प्रबंधन और निर्यात को प्रोत्साहन देने में सहायक सिद्ध होगा।
और पढ़ें: उच्च मूल्य वाले उत्पादों और नए बाजारों पर ध्यान से निर्यात गति बनाए रखी जा सकती है: आर्थिक सर्वेक्षण