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कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उछाल से थोक महंगाई बढ़कर 3.88%, मार्च में तेज़ी दर्ज

मार्च में भारत की थोक महंगाई बढ़कर 3.88% हुई, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और औद्योगिक वस्तुओं की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी रही।

भारत में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित वार्षिक महंगाई दर मार्च महीने में बढ़कर 3.88 प्रतिशत हो गई है। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों में दी गई। फरवरी में थोक महंगाई 2.13 प्रतिशत थी। इस तरह मार्च में महंगाई दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

मंत्रालय के अनुसार थोक महंगाई में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज उछाल के कारण हुई है। इसके अलावा अन्य विनिर्माण उत्पादों, गैर-खाद्य वस्तुओं, बुनियादी धातुओं के निर्माण और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि देखी गई।

प्राथमिक वस्तुओं (वेटेज 22.62%) में मार्च में 6.36 प्रतिशत की महंगाई दर्ज की गई, जिसमें मासिक आधार पर 2.28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसका मुख्य कारण कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेज वृद्धि रहा।

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ईंधन और ऊर्जा (फ्यूल एंड पावर) श्रेणी (वेटेज 13.15%) में भी बदलाव देखा गया और यह -1.05 प्रतिशत से बढ़कर 1.05 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में आए उछाल को दर्शाता है।

विनिर्मित उत्पाद (मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स) श्रेणी (वेटेज 64.23%) में 3.39 प्रतिशत की महंगाई दर्ज की गई, जिसमें 22 में से 16 समूहों में कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई।

विशेषज्ञों के अनुसार यह बढ़ोतरी केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक उत्पादों में भी व्यापक स्तर पर कीमतों में दबाव देखा जा रहा है।

खाद्य सूचकांक में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, जो फरवरी के 192.9 से घटकर मार्च में 192.8 पर आ गया। हालांकि कुल मिलाकर थोक महंगाई में तेज़ी का रुख देखने को मिला है, जो आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।

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