सरकार ने इन्वेंटरी-आधारित सीमा-पार ई-कॉमर्स निर्यात ढांचा लागू किया, एमएसएमई और निर्माताओं को मिलेगा बड़ा लाभ
सरकार ने इन्वेंटरी-आधारित सीमा-पार ई-कॉमर्स निर्यात ढांचा लागू किया है। इससे भारतीय निर्माताओं और एमएसएमई को वैश्विक बाजार, समय पर भुगतान और पारदर्शी निर्यात व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
भारत सरकार ने विदेश व्यापार नीति 2023 के तहत इन्वेंटरी-आधारित सीमा-पार ई-कॉमर्स निर्यात ढांचे (Inventory-based Cross-border E-Commerce Export Framework) को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य भारत में निर्मित वस्तुओं के ई-कॉमर्स के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात को आसान बनाना और भारतीय निर्माताओं, व्यापारियों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, यह ढांचा भारतीय उत्पादों के सीमा-पार ई-कॉमर्स निर्यात के लिए एक व्यापक नीति और प्रक्रियागत व्यवस्था उपलब्ध कराता है। इसके माध्यम से निर्यात प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा। साथ ही इसमें ऐसे कई सुरक्षा प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनसे यह सुनिश्चित होगा कि ई-कॉमर्स निर्यात का अधिकतम लाभ भारतीय निर्माताओं और एमएसएमई को ही मिले तथा नियामकीय निगरानी भी प्रभावी बनी रहे।
नई व्यवस्था के तहत पंजीकृत एक्सपोर्टर-ऑन-रिकॉर्ड के माध्यम से केवल निर्यात के लिए इन्वेंटरी संचालित करने की सुविधा भी प्रदान की गई है। इससे भारतीय विक्रेताओं को अपने उत्पादों का बेहतर प्रबंधन करने और वैश्विक बाजारों तक तेज़ी से पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
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इस ढांचे की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि भारतीय विक्रेताओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा, चाहे विदेशी खरीदार से भुगतान प्राप्त हुआ हो या नहीं। इससे विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों को नकदी प्रवाह संबंधी समस्याओं से राहत मिलेगी और उनका कारोबार अधिक सुरक्षित एवं स्थिर बनेगा।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का मानना है कि यह पहल भारतीय निर्माताओं, व्यापारियों और एमएसएमई की वैश्विक ई-कॉमर्स आपूर्ति श्रृंखलाओं में भागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। संगठित फुलफिलमेंट नेटवर्क तक पहुंच मिलने से भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उपलब्धता बढ़ेगी और निर्यात प्रक्रिया अधिक सुगम होगी।
सरकार का कहना है कि यह ढांचा पारदर्शिता, समय पर भुगतान, निर्यात प्रोत्साहनों का प्रभावी लाभ और मजबूत नियामकीय निगरानी सुनिश्चित करेगा। इससे भारत के ई-कॉमर्स निर्यात क्षेत्र को नई गति मिलेगी और 'मेक इन इंडिया' तथा निर्यात वृद्धि के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
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