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झारखंड परीक्षा विवाद: 10 अगस्त विधानसभा मार्च के मामले में 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर

झारखंड में भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 10 अगस्त को विधानसभा मार्च के मामले में पुलिस ने 300 अज्ञात लोगों पर निषेधाज्ञा उल्लंघन, सरकारी संपत्ति नुकसान और पुलिसकर्मियों पर हमले का मामला दर्ज किया।

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच पुलिस ने 10 अगस्त को विधानसभा मार्च में शामिल 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने यह कार्रवाई गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को की।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, मामला उन लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है, जिनकी पहचान फिलहाल नहीं हो सकी है। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन की ओर से लगाए गए निषेधाज्ञा संबंधी आदेशों का उल्लंघन किया, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर मारपीट की।

यह विधानसभा मार्च राज्य में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के तहत बड़ी संख्या में अभ्यर्थी और समर्थक रांची में जुटे थे।

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पुलिस का कहना है कि 10 अगस्त को विधानसभा की ओर बढ़ने के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने पहले से कुछ प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए थे। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने इन आदेशों का उल्लंघन किया और आगे बढ़ने की कोशिश की।

इसके बाद कथित तौर पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया तथा पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है।

फिलहाल एफआईआर में 300 लोगों को अज्ञात बताया गया है। पुलिस अब घटनास्थल के वीडियो फुटेज, तस्वीरों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश कर सकती है। पहचान होने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में अभ्यर्थियों का आंदोलन पहले से जारी है। प्रदर्शनकारी मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।

10 अगस्त की घटना के बाद दर्ज हुई यह एफआईआर आंदोलन को लेकर प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है। अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होगा कि सरकारी संपत्ति को नुकसान और पुलिस पर हमले के आरोपों में कौन-कौन लोग शामिल थे।

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