कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मरम्मत पूरी होने तक टोल माफ, एनएचएआई ने की बड़ी कार्रवाई
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली बंद रहेगी। एनएचएआई ने ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है। एनएचएआई ने कहा है कि जब तक एक्सप्रेसवे पर चल रहा पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्य पूरी तरह पूरा नहीं हो जाता, तब तक यात्रियों से कोई टोल शुल्क नहीं लिया जाएगा।
एनएचएआई ने बताया कि टोल राजस्व में होने वाले नुकसान की भरपाई संबंधित रियायतकर्ता कंपनी (कंसेशनायर) से की जाएगी। प्राधिकरण ने कहा कि वह राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में गुणवत्ता, सुरक्षा और जवाबदेही के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
जानकारी के अनुसार, एक्सप्रेसवे के प्रभावित हिस्से पर यातायात को दूसरे मार्ग से डायवर्ट किया गया है और वाहनों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है।
ठेकेदार और अधिकारियों पर कार्रवाई
एनएचएआई ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे मामले में रियायतकर्ता कंपनी, स्वतंत्र इंजीनियर और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रभावित हिस्से की जल्द मरम्मत के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं और गुणवत्ता जांच व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
26 जुलाई 2026 को एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 64 के पास सड़क धंसने (पेवमेंट स्लिप) की समस्या सामने आई थी। इसके बाद एनएचएआई ने तकनीकी जांच के आदेश दिए और निर्माण कार्य में लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
एनएचएआई ने बताया कि उसने रियायतकर्ता कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने का प्रस्ताव दिया है। ऐसा होने पर कंपनी भविष्य की एनएचएआई परियोजनाओं की निविदाओं में हिस्सा नहीं ले सकेगी।
इसके अलावा कंपनी पर प्रदर्शन सुरक्षा राशि का दो प्रतिशत जुर्माना लगाने, संबंधित अधिकारियों को तीन साल तक प्रतिबंधित करने और कंपनी की प्रदर्शन रेटिंग घटाने का प्रस्ताव रखा गया है।
एनएचएआई ने कंपनी को अपने खर्च पर क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत करने का निर्देश दिया है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 3 करोड़ रुपये बताई गई है।
प्राधिकरण ने निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, स्वतंत्र इंजीनियर टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटा दिया है। उन्हें सड़क परिवहन मंत्रालय, एनएचएआई और एनएचआईडीसीएल की परियोजनाओं से दो साल के लिए प्रतिबंधित किया गया है।
एक्सप्रेसवे का टोल कितना है?
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर एक तरफ का टोल शुल्क 275 रुपये है। वहीं पुराने हाईवे मार्ग से यात्रा करने पर शुल्क करीब 95 रुपये है। 24 घंटे के भीतर वापसी यात्रा करने पर कुल 415 रुपये टोल देना पड़ता है।