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केरल की चुनावी राजनीति: 40 साल तक बदलती रही सरकार, 2021 में टूटा ट्रेंड

केरल में 40 साल तक हर पांच साल में सरकार बदलती रही, लेकिन 2021 में एलडीएफ ने दोबारा जीतकर यह परंपरा तोड़ दी। अब 2026 चुनाव में नजरें टिकी हैं।

केरल की चुनावी राजनीति लंबे समय तक एक खास पैटर्न के लिए जानी जाती रही है, जहां हर पांच साल में सत्ता बदलती रही। राज्य में मुख्य रूप से दो गठबंधन—लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ)—के बीच सत्ता का अदला-बदली होता रहा। यह सिलसिला करीब चार दशकों तक जारी रहा, जिसे 2021 के विधानसभा चुनाव में तोड़ा गया।

हाल ही में भारत निर्वाचन आयोग ने केरल विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की है। राज्य में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा और 4 मई को मतगणना की जाएगी। सभी 140 सीटों पर चुनाव होगा। मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है।

1970 के दशक से केरल में एक स्पष्ट चुनावी रुझान देखा गया, जिसमें मतदाता हर पांच साल में सरकार बदलते रहे। 1980 से 2016 तक यह ट्रेंड लगातार जारी रहा। 1980-82 में एलडीएफ, 1982-87 में यूडीएफ, 1987-91 में फिर एलडीएफ और 1991-96 में यूडीएफ की सरकार रही। इसके बाद भी यही क्रम चलता रहा—1996-2001 में एलडीएफ, 2001-06 में यूडीएफ (ए.के. एंटनी और ओमन चांडी), 2006-11 में एलडीएफ (वी.एस. अच्युतानंदन) और 2011-16 में फिर यूडीएफ की सरकार बनी।

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हालांकि, 2021 में यह परंपरा टूट गई जब एलडीएफ ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की। पिनराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ ने 140 में से 99 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया।

अब 2026 के चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह नया ट्रेंड जारी रहता है या फिर राज्य पुराने पैटर्न पर लौटता है।

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