पीएम मोदी का डिकोलोनाइजेशन अभियान: 2014 से अब तक बदले गए औपनिवेशिक नामों की पूरी सूची
2014 से पीएम मोदी के नेतृत्व में देशभर में 300 से अधिक औपनिवेशिक नाम बदले गए। दिल्ली, कर्नाटक, शहरों, रेलवे स्टेशनों और सैन्य स्थलों का नाम भारतीय विरासत के अनुसार रखा गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 से देशभर में औपनिवेशिक दौर के नामों को बदलकर भारतीय विरासत और संस्कृति से जुड़े नाम रखने का अभियान तेज हुआ है। इस पहल का उद्देश्य ब्रिटिश शासन की मानसिकता से दूरी बनाते हुए ‘अमृत काल’ के विज़न के तहत राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करना बताया गया है।
दिल्ली में इस बदलाव की शुरुआत प्रमुख प्रतीकों से हुई। 2016 में रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया गया। 2023 में राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ रखा गया और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट का नाम कर्तव्य भवन किया गया। 2025 में साउथ ब्लॉक को सेवा तीर्थ नाम दिया गया, जिससे शासन को सेवा और कर्तव्य से जोड़ने का संदेश दिया गया। इसी क्रम में देशभर के राजभवन और राजनिवास को लोक भवन और लोक निवास नाम दिया गया।
कर्नाटक में 2014 में कई जिलों के नाम बदले गए, जिनमें बेलगाम को बेलगावी, मैंगलोर को मंगलुरु और मैसूर को मैसुरु जैसे नाम शामिल हैं। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर भी कई शहरों और स्थानों के नाम बदले गए। 2016 में गुड़गांव का नाम गुरुग्राम, 2018 में इलाहाबाद का नाम प्रयागराज और फैजाबाद का नाम अयोध्या किया गया। 2023 में औरंगाबाद को छत्रपति संभाजी नगर और उस्मानाबाद को धाराशिव नाम दिया गया।
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इसी तरह रेलवे स्टेशनों, संस्थानों और द्वीपों के नाम भी बदले गए। व्हीलर आइलैंड का नाम एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप रखा गया और राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन का नाम अमृत उद्यान किया गया। 2026 में सेना ने 246 स्थानों के नाम बदलकर युद्ध नायकों के नाम पर रखे।
सरकार का कहना है कि यह अभियान राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है।
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