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मोदी सरकार का जेन-ज़ी पर फोकस, एक दिन, एक विश्वविद्यालय के तहत रोज एक यूनिवर्सिटी जाएंगे केंद्रीय मंत्री

मोदी सरकार जेन-ज़ी और छात्रों से सीधा संवाद बढ़ाने के लिए ‘एक दिन, एक विश्वविद्यालय’ योजना शुरू करने की तैयारी में है। मंत्री शिक्षा, रोजगार, कौशल और योजनाओं पर चर्चा करेंगे।

युवाओं से सीधे संवाद की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जेन-ज़ी और देश के छात्र समुदाय के साथ सीधा संवाद बढ़ाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित एक दिन, एक विश्वविद्यालय’ कार्यक्रम के तहत हर दिन एक केंद्रीय मंत्री किसी एक विश्वविद्यालय का दौरा करेंगे और छात्रों से सीधे बातचीत करेंगे।

इस पहल का उद्देश्य युवाओं की समस्याओं और उनके विचारों को समझना तथा सरकार की छात्र और युवा कल्याण योजनाओं के बारे में उन्हें जानकारी देना है। सूत्रों के मुताबिक, संबंधित मंत्री विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ संवाद करेंगे, उनकी चिंताओं को सुनेंगे और शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास तथा अन्य अवसरों से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा करेंगे।

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यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन जारी रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के कई हिस्सों में छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन किए थे।

सूत्रों के अनुसार, बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंत्रियों और भाजपा नेताओं के सोशल मीडिया पर युवाओं से जुड़ाव के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोशल मीडिया पर सबसे अधिक पहुंच होने की बात भी सामने आई।

शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी और युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया को प्रस्तावित कार्यक्रम के समन्वय की जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी है। देश में करीब 1,300 विश्वविद्यालय हैं, जिनमें 57 केंद्रीय और 522 राज्य विश्वविद्यालय शामिल हैं।

नीट विवाद के दौरान छात्रों के प्रदर्शनों और राजनीतिक दबाव के बीच तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दिया था। ऐसे में विश्वविद्यालयों में सीधे संवाद की यह पहल सरकार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कार्यक्रम के जरिए छात्र परीक्षा, शिक्षा, रोजगार, कौशल, सरकारी योजनाओं और भविष्य के अवसरों से जुड़े सवाल सीधे केंद्रीय मंत्रियों के सामने रख सकेंगे। सरकार के लिए यह युवाओं की प्राथमिकताओं को समझने और अपनी नीतियों को सीधे उन तक पहुंचाने का माध्यम बन सकता है।

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