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मोहम्मद शमी ने एसआईआर सुनवाई पूरी की, बोले— यह प्रक्रिया किसी को नुकसान नहीं पहुंचाती

मोहम्मद शमी ने एसआईआर सुनवाई पूरी कर प्रक्रिया को सुरक्षित बताया और लोगों से भाग लेने की अपील की, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ वाले मतदाताओं के नाम सार्वजनिक करने के आदेश दिए।

भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने मंगलवार को कोलकाता स्थित निर्वाचन आयोग कार्यालय में अपनी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) से जुड़ी सुनवाई पूरी की। सुनवाई के बाद बाहर निकलते हुए शमी ने कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई। उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि वे आगे आकर इस एसआईआर प्रक्रिया में भाग लें, क्योंकि यह किसी के लिए नुकसानदेह नहीं है।

शमी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “कोई दिक्कत नहीं हुई… एसआईआर ऐसी चीज नहीं है जो आपको नुकसान पहुंचाए… जिनके पास एसआईआर फॉर्म नहीं है, उन्हें भी आगे आकर प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।” रिपोर्ट के अनुसार, शमी द्वारा भरे गए एनुमरेशन फॉर्म में कुछ स्थानों पर विसंगतियां पाई गई थीं, जिसके चलते उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया था।

उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले मोहम्मद शमी अपने क्रिकेट करियर के कारण लंबे समय से पश्चिम बंगाल में रह रहे हैं। वह रणजी ट्रॉफी में बंगाल टीम का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।

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इस बीच, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया, जिसमें निर्वाचन आयोग को पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के तहत ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ श्रेणी में आने वाले मतदाताओं के नाम सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने एसआईआर प्रक्रिया में कथित प्रक्रियागत अनियमितताओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। अदालत ने कहा कि जिन लोगों को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ की श्रेणी में रखा गया है, उनके नाम ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक कार्यालयों और वार्ड कार्यालयों में प्रकाशित किए जाएं, ताकि प्रभावित लोग अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग को पर्याप्त जनशक्ति उपलब्ध कराए, ताकि दस्तावेजों और आपत्तियों पर सही तरीके से सुनवाई हो सके।

ईआरओनेट पोर्टल पर 1.2 करोड़ से अधिक नाम ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ श्रेणी में चिन्हित किए जाने के बाद राज्य में इस मुद्दे पर विवाद गहरा गया था। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने इसे भाजपा की हार बताते हुए कहा कि यह बंगाल के लोगों की जीत है और उनके मतदान अधिकारों की रक्षा हुई है।

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