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मुंबई की जल आपूर्ति का आधार हैं सात जलाशय, मानसून की बारिश तय करती है पूरे साल का पानी

मुंबई की जल सुरक्षा सात प्रमुख जलाशयों पर निर्भर है। मानसून की बारिश इन जलाशयों को भरती है और यही पूरे साल करोड़ों लोगों की पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।

मुंबई में हर साल मानसून के दौरान भारी बारिश से जलभराव, बाढ़ और जनजीवन प्रभावित होता है, लेकिन यही बारिश शहर की जल सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार भी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश मुंबई के सात प्रमुख जलाशयों को भरती है, जिनसे महानगर के 1.3 करोड़ से अधिक लोगों को पीने का पानी मिलता है।

मुंबई की पेयजल आपूर्ति मुख्य रूप से भातसा, ऊपरी वैतरणा, मध्य वैतरणा, तानसा, मोडक सागर, विहार और तुलसी जलाशयों से होती है। इनमें भातसा जलाशय सबसे बड़ा है, जिसकी जल भंडारण क्षमता करीब 7,17,037 मिलियन लीटर है। यह मुंबई की कुल जल भंडारण क्षमता का लगभग आधा हिस्सा पूरा करता है।

मुंबई की जल व्यवस्था इस मायने में अलग है कि शहर सालभर की लगभग पूरी पानी की जरूरत चार महीने के दक्षिण-पश्चिम मानसून में जमा करता है। यदि बारिश कम होती है या देर से आती है, तो जलाशयों का स्तर तेजी से गिर सकता है और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को पानी की कटौती और संरक्षण उपाय लागू करने पड़ सकते हैं।

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वर्ष 2026 के मानसून में भी यही स्थिति देखने को मिली। जून में कम बारिश के कारण जलाशयों का स्तर काफी नीचे चला गया था, जिसके बाद बीएमसी ने कुछ जल संरक्षण कदम उठाए। हालांकि, जुलाई के शुरुआती दिनों में हुई तेज बारिश से जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से सुधरा।

मुंबई की जल आपूर्ति व्यवस्था कई एजेंसियों के सहयोग से चलती है। बीएमसी का हाइड्रोलिक इंजीनियर विभाग पानी के शोधन और वितरण की जिम्मेदारी संभालता है, जबकि महाराष्ट्र सरकार का जल संसाधन विभाग प्रमुख बांधों का संचालन करता है।

जुलाई की बारिश के बाद सातों जलाशयों में कुल मिलाकर लगभग 70,326 करोड़ लीटर पानी जमा हो चुका है, जो उनकी कुल क्षमता का करीब 49 प्रतिशत है। विहार और तुलसी जलाशय पूरी क्षमता तक भर चुके हैं।

बीएमसी प्रतिदिन करीब 4,000 मिलियन लीटर शुद्ध पानी मुंबईवासियों तक पहुंचाती है। बढ़ती आबादी और शहरीकरण को देखते हुए भविष्य में पानी की मांग बढ़ने की संभावना है। इसी कारण गारगाई बांध, पिंजाल बांध और दमनगंगा-पिंजाल परियोजनाओं जैसे नए जल स्रोतों पर काम किया जा रहा है।

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