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म्यूचुअल फंड या सीधे शेयरों में निवेश, आपके लिए कौन सा विकल्प बेहतर? समझें पूरा गणित

म्यूचुअल फंड विविधीकरण और पेशेवर प्रबंधन देते हैं, जबकि सीधे शेयर अधिक नियंत्रण देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार निवेश का चुनाव समय, जानकारी, जोखिम क्षमता और अनुशासन पर निर्भर करता है।

निवेश की योजना बनाते समय सबसे बड़ा सवाल सुविधा और नियंत्रण के बीच चुनाव का होता है। म्यूचुअल फंड में पेशेवर प्रबंधक निवेश का संचालन करते हैं और पैसा कई कंपनियों में लगाया जाता है, जबकि सीधे शेयर खरीदने पर निवेशक को हर निर्णय खुद लेना पड़ता है।

म्यूचुअल फंड का सबसे बड़ा फायदा विविधीकरण है। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति ने एक लाख रुपये एक ही शेयर में लगाए और उसकी कीमत 30 प्रतिशत गिर गई, तो 30 हजार रुपये का नुकसान होगा। लेकिन यही रकम 20 शेयरों में बराबर बांट दी जाए और एक शेयर 30 प्रतिशत गिर जाए, तो कुल निवेश पर असर करीब 1.5 प्रतिशत होगा।

स्केलर फील्ड के सह-संस्थापक और सीटीओ रमाकांत यादव के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं कि म्यूचुअल फंड जोखिम-मुक्त हैं। खासकर इक्विटी फंड में बाजार गिरने पर काफी नुकसान हो सकता है। विविधीकरण किसी एक कंपनी के खराब प्रदर्शन से सुरक्षा देता है, लेकिन पूरे बाजार में गिरावट आने पर यह नुकसान नहीं रोकता।

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म्यूचुअल फंड उन निवेशकों के लिए उपयोगी हो सकते हैं, जिनके पास कंपनियों की लगातार रिसर्च करने का समय नहीं है या जो निवेश की शुरुआत कर रहे हैं। दूसरी ओर, सीधे शेयरों में निवेश उन लोगों के लिए उपयुक्त हो सकता है, जिन्हें कंपनियों के वित्तीय आंकड़ों और कारोबार का अध्ययन करने में रुचि है।

यादव के अनुसार, एक लाख रुपये को 15 प्रतिशत सालाना दर से 10 वर्षों तक निवेश करने पर रकम करीब 4.05 लाख रुपये हो सकती है, जबकि 10 प्रतिशत की दर पर यह करीब 2.59 लाख रुपये होगी। हालांकि, शेयरों में गिरावट का जोखिम भी अधिक होता है। किसी शेयर में 50 प्रतिशत गिरावट के बाद मूल रकम तक पहुंचने के लिए उसे 100 प्रतिशत बढ़ना पड़ेगा।

म्यूचुअल फंड में प्रबंधन शुल्क लगता है, जबकि सीधे शेयरों में यह शुल्क नहीं होता। उदाहरण के लिए, एक लाख रुपये को 20 वर्षों तक 12 प्रतिशत की दर से बढ़ाने पर करीब 9.65 लाख रुपये हो सकते हैं। खर्चों के कारण रिटर्न एक प्रतिशत घटकर 11 प्रतिशत रह जाए तो रकम करीब 8.06 लाख रुपये होगी। यानी सिर्फ एक प्रतिशत का अंतर करीब 1.59 लाख रुपये का असर डाल सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक अपनी जानकारी, समय और जोखिम सहने की क्षमता के आधार पर विकल्प चुन सकते हैं। कई निवेशक म्यूचुअल फंड को आधार बनाकर कुछ सीधे शेयरों में भी निवेश करते हैं।

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