नीति आयोग ने जारी किया निर्यात तैयारी सूचकांक 2024, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की निर्यात क्षमता का किया आकलन
नीति आयोग ने EPI 2024 जारी किया, जो राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की निर्यात तैयारी का आकलन करता है और निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए नीति सुझाव देता है।
नीति आयोग ने बुधवार को निर्यात तैयारी सूचकांक (Export Preparedness Index, EPI) 2024 जारी किया, जो भारत के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की निर्यात क्षमता का व्यापक आकलन प्रस्तुत करता है। यह सूचकांक उपराष्ट्रीय आर्थिक संरचनाओं की विविधता और उनके वैश्विक व्यापार लक्ष्यों को साकार करने में अहम भूमिका को मान्यता देता है। अगस्त 2020 में पहली बार प्रकाशित यह सूचकांक अब चौथी बार प्रस्तुत किया गया है।
सूचकांक भारत के 2030 तक एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के वस्तु निर्यात लक्ष्य और विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप तैयार किया गया है। यह राज्यों और जिलों के स्तर पर निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र की ताकत, स्थिरता और समावेशिता का आंकलन करने के लिए प्रमाण आधारित ढांचा प्रदान करता है। इसके माध्यम से प्रमुख संरचनात्मक चुनौतियों, विकास चालकों और नीतिगत अवसरों की पहचान कर राज्यों की निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में मार्गदर्शन मिलता है।
नीति आयोग के सीईओ ने कहा कि भारत के निर्यात मार्ग को राज्यों और जिलों की तैयारी गहराई से आकार दे रही है। उन्होंने निर्यात अवसंरचना को मजबूत करने, लागत प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, मजबूत संस्थानों का निर्माण करने और पारदर्शी, पूर्वानुमेय नीति वातावरण तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि उपराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात तैयारियों को बढ़ाना दीर्घकालिक विकास, रोजगार सृजन, क्षेत्रीय असमानताओं में कमी और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में गहरी एकीकरण के लिए आवश्यक है।
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नीति आयोग के सदस्य डॉ. अरविंद वर्मा ने कहा कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की भूमिका निर्यात गति को बनाए रखने और बढ़ाने में अहम है। उन्होंने कहा कि राज्यों को अपनी ताकत पहचानकर, संरचनात्मक अंतर दूर करके और उभरते व्यापार अवसरों का लाभ उठाने की रणनीतियाँ बनानी चाहिए। साथ ही प्रधानमंत्री के वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उत्पाद गुणवत्ता के महत्व पर भी जोर दिया।
EPI 2024 चार मुख्य स्तंभों पर आधारित है—निर्यात अवसंरचना, व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र, नीति और शासन, और निर्यात प्रदर्शन। ये 13 उप-स्तंभ और 70 संकेतकों में विभाजित हैं, जिससे निर्यात तैयारियों का गहन और नीति-संबंधी विश्लेषण संभव होता है।
सूचकांक में जिला स्तर को निर्यात प्रतिस्पर्धा की मूल इकाई माना गया है, जिससे राष्ट्रीय निर्यात लक्ष्यों को स्थानीय क्षमताओं, औद्योगिक क्लस्टरों और मूल्य श्रृंखला लिंकिंग पर आधारित व्यावहारिक रणनीतियों में बदला जा सके।
सूचकांक डेटा-संचालित और संकेतक-आधारित पद्धति पर आधारित है, जिसमें केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और सार्वजनिक संस्थाओं के आधिकारिक आंकड़ों का उपयोग किया गया है। 2024 संस्करण में मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता, लागत प्रतिस्पर्धा, मानव संसाधन विकास और एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र जैसे नए आयाम शामिल किए गए हैं, जिससे विश्लेषण की सटीकता और नीति प्रासंगिकता में वृद्धि हुई है।
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