यूपीआई के 10 साल पूरे, पीएम मोदी ने बताया डिजिटल भुगतान क्रांति का बड़ा पड़ाव; दुनिया में भारत का बढ़ा दबदबा
यूपीआई के 10 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की डिजिटल भुगतान यात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। यूपीआई अब वैश्विक भुगतान व्यवस्था में अग्रणी है।
भारत में डिजिटल भुगतान की तस्वीर बदलने वाला यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) मंगलवार को अपनी शुरुआत के 10 साल पूरे कर चुका है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपीआई को देश की डिजिटल भुगतान यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया और इसकी व्यापक पहुंच पर गर्व करने की बात कही।
यूपीआई को 25 अगस्त 2016 को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियामकीय निरीक्षण में लॉन्च किया था। पिछले एक दशक में इस प्लेटफॉर्म ने तेज, आसान और डिजिटल लेनदेन को देशभर में लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
वैश्विक डिजिटल भुगतान में यूपीआई का दबदबा
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की जून 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल भुगतान की मात्रा में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत है। इसका अर्थ है कि दुनिया में होने वाले लगभग हर दो रियल-टाइम डिजिटल भुगतानों में एक यूपीआई के जरिए होता है।
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यूपीआई का विस्तार भारत से बाहर भी तेजी से हुआ है। यह 11 देशों में संचालित है। इनमें संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, फ्रांस, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस और कतर शामिल हैं।
जून 2026 में एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड ने कंबोडिया में यूपीआई स्वीकार्यता शुरू करने के लिए एसीएलईडीए बैंक के साथ समझौता किया। इसी महीने ग्रीस में भारत-ग्रीस सीमा पार धन हस्तांतरण के लिए यूपीआई सेवा शुरू हुई। 30 जुलाई 2026 को मालदीव की तत्काल भुगतान प्रणाली ‘फवारा’ और भारत के यूपीआई के बीच सीमा पार भुगतान सेवा भी शुरू की गई।
करोड़ों लेनदेन का आधार
यूपीआई नेटवर्क में वर्तमान में 741 बैंक सक्रिय हैं। जुलाई 2026 में इसके माध्यम से 2,365.8 करोड़ लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य 29.87 लाख करोड़ रुपये रहा।
यूपीआई का पायलट अप्रैल 2016 में 21 सदस्य बैंकों के साथ शुरू हुआ था और अगस्त 2016 में इसे आम जनता के लिए उपलब्ध कराया गया। दिसंबर 2016 में भीम (BHIM) ऐप लॉन्च किया गया, जिससे यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान को और बढ़ावा मिला।
दस वर्षों में यूपीआई ने न केवल भारत में डिजिटल भुगतान को आसान बनाया, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय डिजिटल भुगतान मॉडल की पहचान भी मजबूत की है।
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