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शिक्षा मेरे जीवन की सबसे परिवर्तनकारी शक्ति रही है: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रोमानिया में मानद डॉक्टरेट प्राप्त करते हुए कहा कि शिक्षा ने उनके जीवन को सबसे अधिक बदला और समाज में समान अवसर प्रदान करने का माध्यम बनी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि शिक्षा उनके जीवन की सबसे परिवर्तनकारी शक्ति रही है। उन्होंने यह बात रोमानिया के बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज़ द्वारा प्रदान की गई मानद डॉक्टरेट (डॉक्टर होनोरिस कॉज़ा) की उपाधि स्वीकार करते हुए कही।

राष्ट्रपति मुर्मु को यह विश्वविद्यालय का सर्वोच्च शैक्षणिक सम्मान शिक्षा, सार्वजनिक सेवा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। यह सम्मान उनकी मोल्दोवा, उत्तर मैसिडोनिया और रोमानिया की छह दिवसीय राजकीय यात्रा के अंतिम चरण में दिया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उनका व्यक्तिगत जीवन शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा, "शिक्षा मेरे जीवन की सबसे बड़ी परिवर्तनकारी शक्ति रही है।"

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अपने प्रारंभिक जीवन को याद करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि उनका जन्म एक छोटे से गांव में सीमित संसाधनों वाले परिवार में हुआ था। वह अपने गांव की पहली लड़की थीं, जिसने कॉलेज में प्रवेश लिया। उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें यह सिखाया कि शिक्षा समाज में समान अवसर प्रदान करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। शिक्षा यह नहीं पूछती कि आपका जन्म कहां हुआ, बल्कि यह देखती है कि आप कितनी दूर तक आगे बढ़ने का संकल्प रखते हैं।

राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह इस सम्मान को विनम्रता के साथ भारत के 140 करोड़ नागरिकों की ओर से स्वीकार कर रही हैं। उन्होंने इसे भारत और रोमानिया के बीच गहरी और स्थायी मित्रता का प्रतीक बताया।

उन्होंने अपने शिक्षक के रूप में बिताए समय को भी याद किया और कहा कि साधारण कक्षाएं भी व्यक्तियों, परिवारों और पूरे समाज का भविष्य बदलने की क्षमता रखती हैं।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैज्ञानिक नवाचार के इस दौर में विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे ज्ञान की खोज को नैतिकता, विवेक और करुणा से जोड़कर आगे बढ़ाएं। उन्होंने रवीन्द्रनाथ ठाकुर की 1926 की बुखारेस्ट यात्रा तथा रोमानिया के राष्ट्रीय कवि मिहाई एमिनेस्कु द्वारा उपनिषदों और भगवद्गीता के अध्ययन का उल्लेख करते हुए भारत-रोमानिया के ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंधों को भी रेखांकित किया।

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