भारत-ईयू व्यापार समझौते के खिलाफ आंदोलन की तैयारी में संयुक्त किसान मोर्चा
संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत-ईयू एफटीए को आर्थिक उपनिवेशवाद बताते हुए इसके खिलाफ आंदोलन की घोषणा की, कहा कि आयात शुल्क में कटौती से घरेलू कृषि, छोटे किसान और रोजगार बुरी तरह प्रभावित होंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (इंडिया-ईयू एफटीए) के खिलाफ देशभर में अभियान चलाने की घोषणा की है। किसानों के विभिन्न संगठनों के इस संयुक्त मंच ने इस प्रस्तावित समझौते को “आर्थिक उपनिवेशवाद का खाका” करार दिया है। एसकेएम का कहना है कि यह एफटीए भारतीय बाजार पर कॉरपोरेट कंपनियों के व्यवस्थित कब्जे का रास्ता खोलेगा, घरेलू कृषि और उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाएगा और देश में रोजगार के अवसरों को नष्ट करेगा।
शुक्रवार (30 जनवरी 2026) को जारी बयान में एसकेएम ने आरोप लगाया कि भारत सरकार इस समझौते के तहत कई कृषि और खाद्य उत्पादों पर आयात शुल्क पूरी तरह खत्म करने या उसमें भारी कटौती करने पर सहमत हो गई है। मोर्चा के अनुसार, जैतून का तेल, मार्जरीन और अन्य वनस्पति तेल, फलों के रस, नॉन-अल्कोहलिक बीयर, प्रोसेस्ड फूड जैसे ब्रेड, पेस्ट्री, बिस्कुट, पास्ता, चॉकलेट और पालतू जानवरों का भोजन, साथ ही भेड़ का मांस आयात शुल्क से पूरी तरह मुक्त किए जा रहे हैं।
इसके अलावा, शराब पर आयात शुल्क 150 प्रतिशत से घटाकर 20 से 30 प्रतिशत, स्पिरिट्स पर 150 प्रतिशत से 40 प्रतिशत, बीयर पर 110 प्रतिशत से 50 प्रतिशत, कीवी और नाशपाती पर 33 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तथा सॉसेज और अन्य मांस उत्पादों पर 110 प्रतिशत से 50 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। एसकेएम का कहना है कि भले ही सरकार यह दावा कर रही हो कि कृषि क्षेत्र को पूरी तरह नहीं खोला जा रहा है, लेकिन प्रोसेस्ड फूड बाजार को खोलना घरेलू कृषि उत्पादन और छोटे किसानों पर कहीं अधिक और विनाशकारी प्रभाव डालेगा।
संयुक्त किसान मोर्चा ने चेतावनी दी कि इस समझौते से छोटे और सीमांत किसान, स्थानीय खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां और ग्रामीण रोजगार बुरी तरह प्रभावित होंगे। मोर्चा ने किसानों से संगठित होकर इस एफटीए का विरोध करने और सरकार पर इसे वापस लेने का दबाव बनाने की अपील की है।
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