यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ सारनाथ, प्रधानमंत्री मोदी बोले- हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण
सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जताई और इसे भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक तथा सभ्यतागत विरासत की वैश्विक मान्यता बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान भारत की समृद्ध सभ्यतागत, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर मिली महत्वपूर्ण मान्यता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सारनाथ का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होना पूरे देश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का सारनाथ से गहरा संबंध है, क्योंकि यहीं उन्होंने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना प्रथम उपदेश दिया था। भगवान बुद्ध का करुणा, ज्ञान, शांति और सद्भाव का संदेश आज भी पूरी दुनिया को प्रेरित करता है।
यह घोषणा दक्षिण कोरिया के बुसान में 19 से 29 जुलाई तक आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र के दौरान की गई। विदेश मंत्रालय ने भी इस उपलब्धि का स्वागत करते हुए कहा कि इससे विश्वभर के लोग भगवान बुद्ध के शाश्वत संदेश से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।
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भारत के यूनेस्को स्थायी प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, सारनाथ विश्व इतिहास में विशेष स्थान रखता है क्योंकि यहीं भगवान बुद्ध ने धर्मचक्र प्रवर्तन करते हुए पहला उपदेश दिया और बौद्ध संघ की स्थापना की थी। यहीं प्राप्त सम्राट अशोक का सिंह स्तंभ बाद में भारत का राष्ट्रीय प्रतीक बना, जिससे इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व और बढ़ जाता है।
भारत के यूनेस्को में स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी. शर्मा ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि सारनाथ आज भी विश्वभर के 50 करोड़ से अधिक बौद्ध अनुयायियों के लिए आस्था और चिंतन का केंद्र है। उन्होंने कहा कि यहां की शिक्षाएं विशेष रूप से युवाओं को सत्य, अहिंसा, करुणा और जागरूक जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं।
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपरा की वैश्विक स्वीकृति है।
विश्व धरोहर सूची में शामिल संपत्ति में चौखंडी स्तूप, धामेख स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार, अशोक स्तंभ तथा वाराणसी के निकट स्थित अन्य प्राचीन स्मारक शामिल हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार, यह स्थल लगभग 1,600 वर्षों के धार्मिक, स्थापत्य और सांस्कृतिक विकास का सजीव प्रमाण है।
सारनाथ के शामिल होने के साथ भारत के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की संख्या और बढ़ गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है तथा बौद्ध बहुल देशों के साथ भारत के सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे।