SBI डेटा लीक: ग्राहकों का डेटा डार्क वेब पर उजागर होने की आशंका, बैंक ने की पुष्टि
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि 16 अक्टूबर 2026 को उसे ग्राहकों का डेटा डार्क वेब पर उजागर होने की आशंका संबंधी अलर्ट मिला था।
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने एक स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी है कि बैंक को कुछ डेटा के नुकसान से जुड़ी एक घटना का सामना करना पड़ा है। बैंक की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह मामला उसके ग्राहकों के डेटा से संबंधित है, जिसके डार्क वेब पर उजागर होने की आशंका जताई गई है।
फाइलिंग में SBI ने बताया कि उसे 16 अक्टूबर 2026 को इस संभावित डेटा उल्लंघन से जुड़ी सूचना मिली थी। यह अलर्ट बैंक को तीन अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त हुआ — इनमें बैंक की अपनी थ्रेट इंटेलिजेंस सेवा प्रदाता (Threat Intelligence Service Provider), रक्षा साइबर एजेंसी (Defence Cyber Agency) और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) शामिल हैं। इन तीनों संस्थाओं ने स्वतंत्र रूप से बैंक को आगाह किया कि उसके ग्राहकों से जुड़ा डेटा डार्क वेब पर उजागर हुआ हो सकता है।
बैंक द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, यह अलर्ट एक संदिग्ध घटना से संबंधित है, जिसमें ग्राहकों का संवेदनशील डेटा डार्क वेब पर लीक होने की आशंका जताई गई थी। स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में SBI ने यह स्पष्ट किया कि यह सूचना मिलने के बाद बैंक ने इस मामले पर गौर करना शुरू कर दिया।
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डार्क वेब पर डेटा उजागर होने की आशंका वाली इस तरह की घटनाएं बैंकिंग क्षेत्र में गंभीर चिंता का विषय मानी जाती हैं, क्योंकि इनमें ग्राहकों की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी शामिल होने का खतरा रहता है। रक्षा साइबर एजेंसी और CERT-In जैसी सरकारी एजेंसियों की संलिप्तता यह दर्शाती है कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है, क्योंकि ये दोनों एजेंसियां देश में साइबर सुरक्षा और डिजिटल खतरों पर निगरानी रखने का काम करती हैं।
भारतीय स्टेट बैंक देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक है और इसके करोड़ों ग्राहक हैं, जिनका डेटा बैंक के सिस्टम में संग्रहीत रहता है। ऐसे में किसी भी तरह की डेटा उल्लंघन की घटना का असर बड़ी संख्या में ग्राहकों पर पड़ सकता है। हालांकि, बैंक की फाइलिंग में इस बात का विस्तृत उल्लेख नहीं है कि कितने ग्राहकों का डेटा प्रभावित हुआ है या किस प्रकार की जानकारी लीक होने की आशंका है।
यह घटना स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के माध्यम से सार्वजनिक की गई है, जो यह दर्शाता है कि इस मामले को नियामकीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल इस मामले में आगे की जांच और कार्रवाई को लेकर अधिक विवरण सामने आने की प्रतीक्षा है।
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