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सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर उठाए सवाल, छात्रों के समर्थन की अपील

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कांग्रेस के पीएम आवास प्रदर्शन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नेताओं को छात्रों के साथ जंतर-मंतर पर समर्थन देना चाहिए था।

नीट पेपर लीक मामले को लेकर भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कांग्रेस के हालिया प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर किया गया विरोध प्रदर्शन छात्रों के आंदोलन के प्रति वास्तविक समर्थन नहीं दिखाता है।

सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के समर्थन में भूख हड़ताल कर रहे हैं। पिछले सप्ताह उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उन्होंने वहां भी अपनी भूख हड़ताल जारी रखी। गुरुवार को उनकी भूख हड़ताल का 26वां दिन था। वांगचुक ने कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

एक साक्षात्कार में गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि विपक्षी नेताओं को प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने के बजाय जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ खड़ा होना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक की छवि का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है।

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आंग्मो ने कहा कि जनता अब वास्तविक और दिखावटी राजनीति के बीच अंतर समझती है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री आवास के बाहर किया गया प्रदर्शन सच्चाई से दूर था। अब जनता को गुमराह नहीं किया जा सकता। जागरूक भारत में युवा गलत इरादों वालों को पहचान लेंगे।”

उनका यह बयान उस समय आया है, जब राहुल गांधी और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने 21 जुलाई को नई दिल्ली स्थित 7, लोक कल्याण मार्ग के पास प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन छात्रों के संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के विरोध में किया गया था।

गीतांजलि आंग्मो ने छात्रों के आंदोलन को दिल्ली में हुई हिंसा की घटनाओं से जोड़ने के खिलाफ भी अपील की। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और बिना सबूत किसी भी हिंसक घटना को इस आंदोलन से जोड़ना गलत है।

उन्होंने छात्रों के प्रति निष्पक्ष व्यवहार की मांग करते हुए कहा कि युवाओं को दोषी की तरह पेश करने के बजाय उनकी चिंताओं को सुना जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी व्यवस्था क्यों है, जहां छात्रों की बात सुनने के बजाय पहले उनकी नीयत पर शक किया जाता है।

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