जल्द सस्ती हो सकती है चीनी! ISMA ने कहा- देश में कोई कमी नहीं, आयात और नई पेराई से बढ़ेगी उपलब्धता
चीनी उद्योग ने देश में पर्याप्त भंडार होने का दावा किया है। शुल्क-मुक्त आयात और अक्टूबर से नई चीनी मिलों की पेराई शुरू होने पर कीमतों में राहत मिल सकती है।
देश में चीनी की कमी नहीं
देश में बढ़ती चीनी की कीमतों के बीच भारतीय चीनी मिल संघ (आईएसएमए) ने लोगों की चिंताओं को दूर करते हुए कहा है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में नरमी आ सकती है। संगठन के मुताबिक, शुल्क-मुक्त आयात शुरू होने और नई चीनी मिलों में पेराई शुरू होने से घरेलू बाजार में आपूर्ति बेहतर होगी।
आईएसएमए के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने सोमवार को नई दिल्ली में कहा कि चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें प्रतिकूल मौसम के कारण कम उत्पादन, व्यापारियों और थोक उपभोक्ताओं की ओर से सट्टेबाजी वाली खरीद तथा बाजार में बढ़ा दबाव शामिल है। उन्होंने कहा कि चीनी उद्योग ने कृत्रिम कमी पैदा नहीं की है।
उनके अनुसार, सितंबर के अंत तक देश में करीब 35 लाख टन चीनी का भंडार उपलब्ध रहने की उम्मीद है। इसके अलावा नई पेराई शुरू होने के बाद घरेलू आपूर्ति और मजबूत होगी।
15 अक्टूबर से बढ़ेगा उत्पादन
आईएसएमए के मुताबिक, चीनी मिलें करीब 15 अक्टूबर से काम शुरू कर सकती हैं। अक्टूबर में लगभग 10 से 12 लाख टन चीनी का उत्पादन होने का अनुमान है, जबकि इसी महीने देश की मांग करीब 24 से 25 लाख टन रहने की संभावना है।
शुल्क-मुक्त आयात से कीमतों पर दबाव कम
सरकार ने एक लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। आईएसएमए का कहना है कि आयात के फैसले का असर बाजार में दिखाई देने लगा है और चीनी की कीमतों में नरमी शुरू हुई है।
राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश नाइकनवरे ने बताया कि कुछ आयातित खेप 15 अक्टूबर से पहले भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच सकती हैं। हालांकि, उस तारीख तक कितनी चीनी आएगी, इसका सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है।
ब्राजील से आयात में 40 से 45 दिन लगेंगे
भारत के लिए फिलहाल ब्राजील चीनी आयात का सबसे व्यावहारिक स्रोत माना जा रहा है। ब्राजील से भारतीय बंदरगाहों तक चीनी पहुंचने में करीब 40 से 45 दिन लगते हैं। इसके बाद बंदरगाह से चीनी मिलों तक पहुंचाने में भी अतिरिक्त समय लगता है।
नाइकनवरे के मुताबिक, आयात प्रक्रिया में डीजीएफटी की मंजूरी, आवंटन, लेटर ऑफ क्रेडिट और जहाजों की व्यवस्था जैसे कई चरण शामिल हैं। ब्राजील के बंदरगाहों पर भीड़ से आपूर्ति का समय प्रभावित हो सकता है।
सरकार ने आयात की अंतिम समयसीमा 31 अक्टूबर तय की है, लेकिन उद्योग को उम्मीद है कि रास्ते में मौजूद खेपों के लिए कुछ लचीलापन दिया जा सकता है। ऐसे में आयातित चीनी, नई पेराई और घरेलू उत्पादन आने वाले हफ्तों में कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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