अमेरिकी अपील अदालत का ट्रंप प्रशासन को झटका, कैलिफोर्निया मतदाता सूची मामले में फैसला पलटा
एक अमेरिकी अपील अदालत ने ट्रंप प्रशासन के उस प्रयास को रोक दिया, जिसमें कैलिफोर्निया को कथित गैर-नागरिकों की सूची में शामिल मतदाताओं के बैलेट गिनने से रोकने की कोशिश की गई थी।
अमेरिका की एक संघीय अपील अदालत ने ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका देते हुए एक ऐसे प्रयास पर रोक लगा दी है, जिसके तहत सरकार कैलिफोर्निया राज्य को कथित गैर-नागरिकों की सूची में दर्ज मतदाताओं के बैलेट गिनने से रोकना चाहती थी।
अदालत के इस फैसले को कैलिफोर्निया प्रशासन की बड़ी कानूनी जीत के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि कुछ ऐसे व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में शामिल हैं, जो अमेरिका के नागरिक नहीं हैं, और इसलिए उनके द्वारा डाले गए बैलेट पत्रों की गिनती नहीं होनी चाहिए। इसी आधार पर प्रशासन ने कैलिफोर्निया पर कार्रवाई करने का दबाव बनाया था ताकि संबंधित सूची से जुड़े बैलेट को मतगणना प्रक्रिया से बाहर रखा जा सके।
हालांकि, अपील अदालत ने इस मांग को खारिज करते हुए कैलिफोर्निया को इन बैलेट पत्रों की गिनती जारी रखने की अनुमति दी है। अदालत के इस आदेश से राज्य में चुनावी प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सकेगी, और प्रशासन की ओर से उठाए गए कदम को कानूनी तौर पर अमान्य करार दिया गया है।
और पढ़ें: यूपी एमएलसी चुनाव: 11 सीटों पर आज मतगणना, भाजपा-सपा के बीच सीधा मुकाबला
यह मामला अमेरिका में मतदाता पात्रता और नागरिकता सत्यापन को लेकर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा है, जिसमें कई राज्यों और संघीय सरकार के बीच मतदाता सूचियों की शुद्धता को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं। ट्रंप प्रशासन लगातार यह दावा करता रहा है कि कुछ राज्यों की मतदाता सूचियों में अनियमितताएं हैं और गैर-नागरिकों के नाम शामिल होने की आशंका है। वहीं कैलिफोर्निया प्रशासन का रुख रहा है कि राज्य की मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी है, और किसी भी सूची के आधार पर मतदाताओं के अधिकारों में कटौती नहीं की जानी चाहिए।
अदालत के इस ताजा फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन के लिए आगे की कानूनी रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि सरकार इस आदेश के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई पर विचार कर सकती है, हालांकि फिलहाल अदालत के आदेश के अनुसार कैलिफोर्निया में संबंधित बैलेट पत्रों की गिनती बिना किसी अवरोध के जारी रहेगी।
इस फैसले का असर आगामी चुनावी प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है, क्योंकि मतदाता सूचियों और नागरिकता सत्यापन से जुड़े इसी तरह के विवाद अन्य राज्यों में भी उठ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला संघीय और राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र को लेकर भविष्य में एक महत्वपूर्ण नज़ीर बन सकता है।
और पढ़ें: चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का असर: 28 अक्टूबर से बिहार में बारिश, वज्रपात और तेज हवा का अलर्ट