तीन साल बाद आरबीआई ने क्यों बढ़ाई रेपो दर? जानिए फैसले की बड़ी वजहें
आरबीआई ने तीन साल से अधिक समय बाद रेपो दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत की। महंगाई, कच्चे तेल की कीमत, कमजोर मानसून और रुपये पर दबाव प्रमुख कारण रहे।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने तीन साल से अधिक समय बाद अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया। यह दिसंबर 2024 में गवर्नर संजय मल्होत्रा के पद संभालने के बाद पहली दर वृद्धि है।
आरबीआई ने अपनी नीति का रुख भी बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी चरणबद्ध सख्ती कर दिया है। संजय मल्होत्रा ने कहा कि निकट अवधि में दर कटौती की संभावना नहीं है और आगे फैसला परिस्थितियों के आधार पर दर बढ़ाने या उसे स्थिर रखने तक सीमित रहेगा।
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव इस फैसले की प्रमुख वजहों में शामिल है। क्षेत्रीय संघर्ष ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित किया है और वैश्विक कच्चे तेल तथा अन्य जिंसों की कीमतों में अस्थिरता बढ़ी है। महंगी ऊर्जा और कच्चे माल की लागत कंपनियों को उपभोक्ताओं पर बोझ डालने के लिए मजबूर कर सकती है, जिससे आयातित महंगाई बढ़ने का जोखिम है।
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दूसरी वजह भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि है। घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। ऐसे में आरबीआई के पास महंगाई के संभावित दबाव को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दर बढ़ाने की गुंजाइश है, बिना आर्थिक सुधार की गति को बड़ा झटका दिए।
वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों की नीतियों और रुपये में उतार-चढ़ाव ने भी भूमिका निभाई है। ऊंची वैश्विक तेल कीमतें रुपये पर दबाव बढ़ा सकती हैं और आयात महंगा कर सकती हैं।
इसके अलावा, कमजोर मानसूनी वितरण और अल-नीनो परिस्थितियों ने कृषि उत्पादन पर दबाव बढ़ाया है। खाद्य कीमतों में वृद्धि से खुदरा महंगाई बढ़ने का खतरा है।
बैंकबाजार के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदिल शेट्टी के अनुसार, अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई 4.5 से बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई अनुमान 5.2 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं, अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
आरबीआई ने यह भी कहा कि मौद्रिक और ऋण वृद्धि की मजबूत गति अतिरिक्त जोखिम पैदा कर रही है। पिरामल समूह के मुख्य अर्थशास्त्री देबोपम चौधरी के मुताबिक, दर वृद्धि रुपये और महंगाई को स्थिर रखने की दिशा में एहतियाती कदम है।
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