एपीसीआर रिपोर्ट में उत्तराखंड में नफरत की राजनीति और मुसलमानों के खिलाफ हिंसा पर चिंता
एपीसीआर की रिपोर्ट में उत्तराखंड में मुसलमानों के खिलाफ नफरत की राजनीति, सांप्रदायिक हिंसा और विस्थापन पर गंभीर चिंता जताई गई है और संवैधानिक मूल्यों के क्षरण की चेतावनी दी गई है।
एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) की एक हालिया तथ्य-जांच रिपोर्ट में उत्तराखंड में मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा, विस्थापन और सामाजिक बहिष्कार के मामलों को गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में मुस्लिम समुदाय को व्यवस्थित और योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाए जाने का एक पैटर्न उभरकर सामने आया है।
जांच टीम में वकील, पूर्व नौकरशाह, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल थे। टीम ने अपनी रिपोर्ट ‘Excluded, Targeted, & Displaced: Communal Narratives and Violence in Uttarakhand’ 21 जनवरी को जारी की। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में “नफरत की राजनीति” के चलते मानवाधिकारों का लगातार उल्लंघन हो रहा है और संवैधानिक सुरक्षा उपायों का धीरे-धीरे क्षरण देखा जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के वर्षों में कई इलाकों में मुस्लिम परिवारों को सामाजिक बहिष्कार, आर्थिक दबाव, धमकियों और हिंसक घटनाओं का सामना करना पड़ा है। कई मामलों में भय और असुरक्षा के माहौल के कारण लोगों को अपने घर और आजीविका छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। रिपोर्ट का दावा है कि यह घटनाएं अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का हिस्सा बनती जा रही हैं, जो धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देता है।
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रिपोर्ट में प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि कई मामलों में पीड़ितों को पर्याप्त कानूनी संरक्षण नहीं मिला और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई का अभाव रहा। रिपोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वे संविधान में निहित समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के शासन के सिद्धांतों को सख्ती से लागू करें।
संगठन ने मांग की है कि उत्तराखंड में हुई सांप्रदायिक हिंसा की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, पीड़ितों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाए और नफरत फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सके।
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