दक्षिण प्रशांत में चीन की बैलिस्टिक मिसाइल टेस्ट से बढ़ी हलचल, अमेरिका को रणनीतिक संदेश?
चीन ने दक्षिण प्रशांत में बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण कर अपनी परमाणु क्षमता का प्रदर्शन किया। इसे अमेरिका के लिए रणनीतिक संदेश माना जा रहा है, जबकि प्रशांत देशों ने चिंता जताई है।
चीन ने दक्षिण प्रशांत महासागर में बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर वैश्विक स्तर पर नई रणनीतिक बहस छेड़ दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि अमेरिका को अपनी बढ़ती परमाणु और समुद्री सैन्य क्षमता का स्पष्ट संदेश देने की कोशिश है।
रिपोर्टों के अनुसार, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। माना जा रहा है कि मिसाइल को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी से दागा गया। इससे चीन ने अपनी 'न्यूक्लियर ट्रायड' क्षमता का प्रदर्शन किया, जिसके तहत कोई देश जमीन, समुद्र और हवा—तीनों माध्यमों से परमाणु हमला करने में सक्षम होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस परीक्षण से चीन ने अपनी 'सेकेंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी' भी प्रदर्शित की है। इसका अर्थ है कि यदि किसी देश पर पहले परमाणु हमला हो जाए, तब भी वह प्रभावी जवाबी हमला करने की क्षमता रखता है। समुद्र में मौजूद पनडुब्बियों का पता लगाना कठिन होने के कारण यह क्षमता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
हालांकि, इस परीक्षण पर ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, जापान और कई प्रशांत द्वीपीय देशों ने चिंता जताई है। इन देशों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त पूर्व सूचना नहीं दी गई। सोलोमन द्वीप के प्रधानमंत्री मैथ्यू वेले ने भी कहा कि इस तरह की गतिविधियां क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए चिंता का विषय हैं।
चीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह उसकी नियमित सैन्य कवायद का हिस्सा था और संबंधित देशों को पहले ही सूचित कर दिया गया था। वहीं, रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह परीक्षण इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा और चीन-अमेरिका के बीच शक्ति संतुलन की बदलती तस्वीर को दर्शाता है। आने वाले समय में इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ सकता है।
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