मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर कांग्रेस का चुनाव आयोग पर हमला, फैसले को बताया स्पष्ट रूप से अवैध
राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर कांग्रेस ने चुनाव आयोग से पुनर्विचार की मांग की। पार्टी ने फैसले को अनुचित और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया।
मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया में कांग्रेस को बड़ा झटका लगने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। कांग्रेस ने अपनी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए इसे अनुचित और कानूनी रूप से संदिग्ध बताया।
प्रतिनिधिमंडल में के. सी. वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला, जयराम रमेश, दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा, अभिषेक मनु सिंघवी और मीनाक्षी नटराजन शामिल थीं। नेताओं ने चुनाव आयोग के समक्ष विस्तृत पक्ष रखते हुए कहा कि नामांकन रद्द करने का आधार उचित नहीं था।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि नामांकन को फॉर्म-26 से जुड़े मुद्दों के आधार पर खारिज किया गया, जबकि ऐसा कोई वैध आपराधिक मामला या खुलासा नहीं था जो इस कार्रवाई को सही ठहराता हो। उन्होंने कहा कि इस फैसले से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई है और उम्मीदवार को समान अवसर नहीं मिला।
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सिंघवी ने यह भी बताया कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग से तत्काल पुनर्विचार करने का आग्रह किया है, क्योंकि नामांकन वापसी की अंतिम तिथि के दिन यह फैसला आया, जिससे सुधार या समीक्षा के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।
हालांकि चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि फॉर्म-26 में किसी भी प्रकार की कमी या त्रुटि को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पहले ही मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति जताई थी। भाजपा का आरोप था कि नामांकन पत्रों में विसंगतियां थीं और कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई गई थीं। नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना मजबूत हो गई है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है।