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दिल्ली मेट्रो में महिला से छेड़छाड़: अदालत ने दोषी की सजा बरकरार रखी, सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन की जरूरत बताई

दिल्ली की अदालत ने मेट्रो में महिला से छेड़छाड़ के मामले में आरोपी की सजा बरकरार रखी और सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत बताई।

दिल्ली की एक अदालत ने मेट्रो ट्रेन के भीतर महिला से छेड़छाड़ करने के आरोपी की सजा को बरकरार रखते हुए सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी ने आरोपी मोहम्मद ताहिर द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया। मोहम्मद ताहिर ने अपने खिलाफ दर्ज दोषसिद्धि को चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने उसके तर्कों को स्वीकार नहीं किया।

मोहम्मद ताहिर को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की मर्यादा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और धारा 354 (यौन उत्पीड़न) के तहत दोषी ठहराया गया था। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए सजा को बरकरार रखा।

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अदालत ने 24 मई 2025 को दिए गए दोषसिद्धि के फैसले और 6 अक्टूबर 2025 को सुनाई गई सजा को भी मान्य माना। यह आदेश न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी छाया त्यागी द्वारा पारित किया गया था।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक परिवहन में सख्त और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि ऐसे मामलों से महिलाओं में असुरक्षा की भावना पैदा होती है और इसे रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था जरूरी है।

अदालत के इस फैसले को महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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