चार उपमुख्यमंत्री फार्मूले के पक्ष में नहीं डी.के. शिवकुमार, आज होगी कर्नाटक कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक
डी.के. शिवकुमार ने चार उपमुख्यमंत्री बनाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। आज होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक में कर्नाटक के नए नेतृत्व और सरकार गठन पर चर्चा होगी।
कर्नाटक में नई कांग्रेस सरकार के गठन से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री पद संभालने से पहले ही डी.के. शिवकुमार ने कथित तौर पर राज्य में चार उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। सूत्रों के अनुसार, शिवकुमार का मानना है कि कांग्रेस में कई वरिष्ठ नेता हैं और कुछ चुनिंदा नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाकर बाकी को नजरअंदाज करने से पार्टी के भीतर असंतोष पैदा हो सकता है।
बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर कांग्रेस हाईकमान के साथ चर्चा की जाएगी, क्योंकि पार्टी नई सरकार के स्वरूप को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है।
यह घटनाक्रम कांग्रेस नेतृत्व द्वारा सिद्धारमैया की जगह डी.के. शिवकुमार को कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री बनाने के निर्णय के बाद सामने आया है। लंबे समय से चल रही सत्ता साझेदारी की अटकलों पर विराम लगाते हुए पार्टी ने नेतृत्व परिवर्तन का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक, शिवकुमार 1 जून या 3 जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।
कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की महत्वपूर्ण बैठक आज शाम 4 बजे विधानसभा के सम्मेलन कक्ष में आयोजित होगी। इस बैठक में पार्टी अपने नए विधायक दल के नेता का चयन कर सकती है। कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया बैठक में शामिल होने से पहले तुमकुरु जाकर दिवंगत पूर्व मंत्री के. वेंकटरमणप्पा को श्रद्धांजलि देंगे।
सूत्रों का कहना है कि पहले चरण के शपथ ग्रहण समारोह में शिवकुमार के साथ केवल कुछ मंत्रियों को ही शपथ दिलाई जा सकती है। पूर्ण मंत्रिमंडल विस्तार बाद में कांग्रेस हाईकमान और राज्य नेतृत्व के बीच विचार-विमर्श के बाद किया जाएगा। कर्नाटक में विधानसभा की संख्या के आधार पर अधिकतम 32 मंत्री बनाए जा सकते हैं।
मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले संभावित नेताओं में एम.बी. पाटिल, जी. परमेश्वर, के.जे. जॉर्ज, प्रियंक खड़गे, यतींद्र सिद्धारमैया, के.बी. गौड़ा, लक्ष्मी हेब्बालकर, बी. सुरेश और संतोष लाड के नाम चर्चा में हैं।
वहीं, विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए के.एच. मुनियप्पा और एच.के. पाटिल प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व के सामने अब विभिन्न गुटों को संतुष्ट रखते हुए सत्ता हस्तांतरण को सुचारु रूप से पूरा करने की चुनौती है।
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