DRDO ने पेश किए आधुनिक बख्तरबंद प्लेटफॉर्म, भारत की रक्षा क्षमता में बड़ा कदम
DRDO ने नए ट्रैक्ड और व्हील्ड बख्तरबंद प्लेटफॉर्म पेश किए, जिनमें 30 मिमी टरेट और उच्च सुरक्षा क्षमता है। यह भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए अपने नए उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म का अनावरण किया है। ये प्लेटफॉर्म ट्रैक्ड (Tracked) और व्हील्ड (Wheeled) दोनों स्वरूपों में विकसित किए गए हैं, जिन्हें व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट द्वारा तैयार किया गया है। इनका औपचारिक प्रदर्शन शनिवार को अहिल्यानगर स्थित DRDO परिसर में किया गया, जहां रक्षा अनुसंधान एवं विकास सचिव तथा DRDO अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने इन्हें प्रस्तुत किया।
ये आधुनिक प्लेटफॉर्म भारतीय सशस्त्र बलों की बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। इनमें स्वदेशी रूप से विकसित 30 मिमी का क्रूलेस टरेट (Crewless Turret) लगाया गया है, जो अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। इससे न केवल फायरपावर बढ़ती है बल्कि गतिशीलता और सुरक्षा क्षमता भी मजबूत होती है।
इन प्लेटफॉर्म्स में हाई-पावर इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन सिस्टम लगाया गया है, जिससे बेहतर स्पीड, अधिक शक्ति-भार अनुपात और बाधाओं को पार करने की क्षमता मिलती है। ये प्लेटफॉर्म STANAG लेवल 4 और 5 सुरक्षा प्रदान करते हैं, जो इन्हें अत्यंत सुरक्षित बनाते हैं।
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इसके अलावा इनमें मॉड्यूलर ब्लास्ट और बैलिस्टिक प्रोटेक्शन सिस्टम भी शामिल है। इनकी एक महत्वपूर्ण विशेषता इनकी एम्फीबियस (Amphibious) क्षमता है, जिसमें हाइड्रो जेट तकनीक का उपयोग कर पानी में भी आसानी से संचालन संभव है।
30 मिमी टरेट में 7.62 मिमी PKT गन और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) लॉन्च करने की क्षमता भी है, जिससे यह बहु-भूमिका वाले मिशनों में उपयोगी बनता है। वर्तमान में इन प्रणालियों में 65 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसे भविष्य में 90 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
DRDO और भारतीय नौसेना ने हाल ही में ‘एयर ड्रॉपेबल कंटेनर’ के सफल परीक्षण भी किए थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
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