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फर्जी सब्जी कारोबार घोटाले में चार दोषी करार, 18 साल बाद मिला न्याय

मायलापुर में फर्जी सब्जी कारोबार के नाम पर ठगी करने वाले चार आरोपी 18 साल बाद दोषी करार दिए गए। अदालत ने उन्हें चार साल की सजा सुनाई।

चेन्नई के मायलापुर इलाके में दर्ज एक धोखाधड़ी मामले में लगभग 18 साल बाद अदालत ने चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए चार साल की सजा सुनाई है। यह मामला एक फर्जी सब्जी व्यापार के नाम पर निवेशकों से ठगी करने से जुड़ा था।

यह केस वर्ष 2008 में मायलापुर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता एम. कल्पना, जो मायलापुर की निवासी हैं, ने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने उन्हें और अन्य निवेशकों को एक लाभदायक सब्जी कारोबार में निवेश करने का लालच दिया। आरोपियों ने दावा किया था कि इस व्यापार से उन्हें भारी मुनाफा मिलेगा, लेकिन बाद में यह पूरा कारोबार फर्जी निकला।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से निवेशकों को झांसा दिया और उनसे बड़ी रकम वसूल ली। इस मामले में चार लोगों को भारतीय दंड संहिता की धारा 120(बी) (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

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हालांकि आरोपियों को वर्ष 2009 में ही गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन अदालत में सुनवाई लंबे समय तक चलती रही। सुनवाई में देरी का मुख्य कारण आरोपियों का कई बार अदालत में पेश न होना और विभिन्न प्रक्रियात्मक बाधाएं रहीं।

अंततः सोमवार को शहर की अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए प्रत्येक को चार साल की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले को पीड़ितों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने वर्षों तक न्याय का इंतजार किया।

यह मामला दर्शाता है कि आर्थिक अपराधों में देरी के बावजूद कानून अंततः अपना काम करता है और दोषियों को सजा मिलती है।

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